यीडा में 24 करोड़ का एक और जमीन घोटाला

पीसी गुप्ता समेत दो दर्जन अफसर, उनके रिश्तेदार और चहेते आरोपी

ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में हुए 126 करोड़ के जमीन घोटाले का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक और घोटाले की गूंज सुनाई देने लगी है। यह मामला प्राधिकरण के मास्टर प्लान से बाहर हाथरस जिले से जुड़ा है। हाथरस के मिधावली गांव में मास्टर प्लान से बाहर करीब 15 हेक्टेयर जमीन की खरीद का है। इस घोटाले में यमुना अथॉरिटी को लगभग 24 करोड़ का चूना लगा है। प्राधिकरण की ओर से जमीन के एवज में भुगतान कर दिया गया है, लेकिन जमीन पर अब भी प्राधिकरण का कब्जा नहीं है। भविष्य में भी यह जमीन प्राधिकरण के उपयोग की नहीं है। यमुना प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने इस मामले में पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता समेत डेढ़ दर्जन से अधिक सरकारी कर्मचारियों और एक दर्जन से अ्रधिक बाहरी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, संबंधित लोगों से यह धन वसूलने और जमीन के बैनामे को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि बीते वर्ष यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में 126.42 करोड़ रुपये का जमीन घोटाला उजागर हुआ था। उस मामले में प्राधिकरण के पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता समेत कई लोग अभी जेल में हैं। बताया जाता है कि वर्ष-2014 में हाथरस जिले के गांव मिधावली में 14 हेक्टेयर जमीन की खरीदारी की गई थी। इसके लिए किसानों से बैनामा कराया गया और उसके एवज में भुगतान कर दिया गया। जिस समय जमीन का सौदा हुआ, उस समय प्राधिकरण के सीईओ पीसी गुप्ता ही थे। यह जमीन किसानों को मुआवजे में 7 प्रतिशत विकसित भूखंड देने के नाम पर खरीदी गई। जबकि हकीकत में इस जमीन का भविष्य में भी प्राधिकरण के लिए कोई उपयोग नहीं है।

बताया जाता है कि इस भूमि घोटाले में प्राधिकरण के अफसर, उनके रिश्तेदार और चहेते शामिल हैं। जिन लोगों पर जमीन घोटाले का आरोप है, उनमें पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता, पूर्व डीसीईओ सतीश कुमार, पूर्व ओएसडी वीपी सिंह, तहसीलदार अजीत परेश, तहसीलदार राजेश शुक्ला, तहसीलदार रणवीर सिंह, तहसीलदार सुरेश चंद शर्मा, नायब तहसीलदार चमन सिंह, प्रबंधक अतुल कुमार सिंह, लेखपाल पंकज कुमार, वित्त विभाग के जीएम, मैनेजर, एकाउन्टेंट, सहायक लेखाकार शामिल हैं। इनके अलावा मनोज कुमार, गौरव, अनिल कुमार, निर्देश चौधरी, सत्येंद्र, स्वदेश गुप्ता, मेसर्स एएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड, विवेक कुमार जैन, धीरेंद्र सिंह चौहान, मदन पाल सिंह और अजित कुमार सिंह भी आरोपी हैं। बताया जाता है कि ये सभी लोग मथुरा भूमि घोटाले में भी आरोपी हैं। इनके खिलाफ यमुना प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने भारतीय दंड संहिता की धारा-420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

बताया जाता है कि इस भूमि घोटाले में जो आरोपी हैं, उनमें ज्यादातर गाजियाबाद, दिल्ली, आगरा और बुलंदशहर के रहने वाले हैं। इतना ही नहीं, प्राधिकरण ने क्रय किए गए खसरों का संपूर्ण क्षेत्रफल नहीं खरीदा है। यह भी बताया जाता है कि खरीदी गई भूमि प्राधिकरण के मास्टर प्लान में भी शामिल नहीं है। इस जमीन की कीमत सुनियोजित तरीके से 30-30 लाख रुपये के चेक से किया गया, ताकि वह आयकर विभाग की नजरों में न आ पाएं।

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