5एफ ईको फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने 14 सर्पो को सपेरों से कराया मुक्त

-विषैले व गैर विषैले सांपो का संरक्षण कर उन्हें लोगो से दूर जंगल मे सुरक्षित स्थान पर छोड़ देती है संस्था

आगरा, (आकाश जैन)। सर्प और मानव का रिश्ता सृष्टि के प्रारंभ काल से रहा है। सर्प को हिंदू शास्त्रों में पूजनीय माना गया है जोकि भगवान शिव के गले का हार है, तो वही भगवान विष्णु की शैय्या भी है। एक ओर जहां इन सर्प को पूजनीय माना गया है। वहीं, दूसरी ओर सर्प को अपने पिटारे में बन्द कर अपनी आजीविका चलाने वाले सपेरे इन्हें यातनाएं भी देते हैं।

हिन्दू धर्म मे सावन के महीने में खासकर सावन के सोमवार को सर्प को दूध पिलाया जाता है और इनके दर्शन अत्यंत शुभ माने जाते है। वर्षा ऋतु के महीनों में अधिकांश लोगों को मंदिरों, गलियों व घरों में सर्प या नाग देखने को मिल ही जाते है। एक तरफ जहां हम मंदिर में दिखे सर्प की पूजा अर्चना करते हैं तो दूसरी तरफ घरों में निकल आने वाले सर्प को मार भी देते है जोकि एक विडंबना है।

ऐसे ही सर्पों या नागों को सपेरों के चंगुल से मुक्त कराने के कार्य में संलग्न एक गैर सरकारी संगठन 5एफ ईको फाउंडेशन ऑफ इंडिया विषैले सांपो को पकड़ने का कार्य करता है और सांपो का संरक्षण कर उन्हें लोगो से दूर जंगल मे सुरक्षित स्थान पर छोड़ देती है। इसी क्रम में सावन के सोमवार के अवसर पर संस्था के सौरभ राणा, विपिन क़पूर,शुभ कपूर,अक्षित दुआ ने मिलकर एक अभियान चलाया।

इस अभियान के तहत लगभग 14 सर्पो को सपेरों के चंगुल से आजाद कराया, जिनमे मनकामेश्वर मंदिर से तीन कोबरा, चार रेट स्नेक (धामन), रावली मंदिर से तीन कोबरा, दो स्नेक (धमन), दो कॉमन सन्डवोहा इनमें से उपरोक्त दो कोबरा एवं एक धामन सर्प की हालत बहुत ही नाजुक बताई जा रही है जिन्हें उपचार के बाद वन विभाग के आला अधिकारी डीएफओ अखिलेश पाण्डेय, सिटी रेंजर रामगोपाल चौहान, एसडीओ देवेन्द्र सिंह के संज्ञान से वाईपुर रेंज वन विभाग आगरा में स्वतंत्र कर दिया।

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