प्रधानमंत्री की ‘सौभाग्य’ योजना को धूल चटाता यूपीसीएल!

अब मतदान के वहिष्कार को मजबूर क्षेत्रवासी

देहरादून। भारत सरकार की हर घर को बिजली और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की प्रदेश के अन्तिम छोर के अन्तिम गांव के अन्तिम मकान को ‘सौभाग्य’ योजना के अंतर्गत रोशन करने के इरादों को यूपीसीएल के अधिकारी ठेंगा दिखा रहे हैं। राजधानी से महज 5-7 किलोमीटर दूर बसा गांव का जब यह हाल है तो सुदूरवर्ती पहाड़ी दुर्गम क्षेत्रों के निवासियों का क्या हाल होगा, इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है।

ज्ञात हो कि पहले भी कई बार खोजबीन कर यूपीसीएल के कारनामों की पोल खोली जा चुकी है। परिणामस्वरूप आनन-फानन में ही 24 और 48 घन्टों में ही जबाबतलवी और कार्रवाई के डर से 10-10 और 17-17 खम्बे लगवाकर जैतनबाला क्षेत्र में दो-दो और पांच-पांच परिवारों को सौभाग्य योजना के अंतर्गत बिजली कनेक्शन दिए गए। परंतु यह मुख्यमंत्री के आधीन ऊर्जा विभाग का यूपीसीएल है, जो योजना को पलीता लगाने में जुटा है। बार बार सरकार को गलत आंकड़े प्रस्तुत कर झूठी वाहवाही व अपने चहेते देहरादून के कुछ अधिकारियों को ऊर्जा मंत्रालय की आंखों में धूल झोंक कर पुरुस्कृत करा चुका है।

विभाग के एमडी बीसीके मिश्रा की माने तो पूरे प्रदेश में लगभग साढ़े तीन लाख कनेक्शन दिया जाना प्रस्तावित था। एक सप्ताह पूर्व केवल 2,41,571 कनेक्शन दिए गए हैं। 75 प्रतिशत को शत-प्रतिशत सफलता बताने वाले इन अधिकारियों की कार्यकुशलता का अंदाजा बड़ी आसानी से दिखाई पड़ता है। जबकि अभी यथार्थ में लगभग एक लाख और कनेक्शन दिया जाना शेष है। यहाँ तो समय से पहले का डंका पीटकर कर्तव्य की नही पुरस्कार हथियाने की होड़ लगी है।

ज्ञात हो कि तहकीकात में विगत दिनों तहसील सदर की ग्रामसभा रिखोली के सौंला गांव के नारायण सिंह, उमराव सिंह, डममर सिंह, प्रेम सिंह, भीम सिंह, सुरेंद्र सिंह, होशियार सिंह व रमेश पुण्डीर ने बताया कि उनके आठ परिवारों के लगभग 25 सदस्यों को अंधेरे में रहकर गुजर बसर को मजबूर होना पड़ रहा है। उस पर यूपीसीएल के ये अधिकारी बिना धूप के इस गांव को केवल दो सोलर प्लेट लगाकर एहसान जता रहे हैं। मजे की बात तो यह है कि इस गांव में धूप कभी कभी दिखाई पड़ती है। तब ऐसे में भला कुछ दिनों तक चलने वाली सोलर लाइट कितनी और कब तक कारगर होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जबकि वास्तविकता यह है कि एक डिवीजन दूसरे डिवीजन पर टालमटोल कर केवल 5-7 खंभों से विद्युतीकरण का ढोल पीटा जा रहा है। ज्ञात हो कि सेलाकुई सब डिवीजन क्षेत्र के लुनियास और बकरां गांव की ओर से बड़ी आसानी से इस गांव को रोशन किया जा सकता है। लेकिन अधिकारी लोगों को कई माह से चक्कर कटवा रहे हैं।

यूपीसीएल के एमडी से जब इस सम्बंध में जानकारी चाही गई तो उनका भी रवैया संतोषजनक नहीं रहा। वे भी टालमटोल करते रहे। अब इस विभाग की उपेक्षा से आजिज लुनियास, बकरां व सौंला गांव के लोग लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने की बात भी कह रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि विगत 10 जनवरी को ऐसा ही एक मामला ग्राम मोथरोवाला (दौडबाला) का प्रकाश में आया था। विभाग के अफसरों ने गांव वालों को यह कहकर टरका दिया था कि यह गांव नगर निगम क्षेत्र में आ गया है, इसलिए सौभाग्य योजना में कनेक्शन नहीं दिया जा सकता है। पीड़ित महिला आरती थापा की अगर माने तो जब एसडीओ और जेई अपने लाइनमैन के साथ उसके घर मीटर लगाने जब आए, तब उससे दो हजार रुपये की मांग की गई। उसका कहना है कि यदि वह उनकी इस मांग को पूरी कर देती तो आज उसका घर भी रोशन होता। अब देखना दिलचस्प होगा कि ऊर्जा विभाग के सचिव का इन प्रकरणों पर क्या रुख होगा, या फिर यूं ही….।

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