भारतीय भाषाओं के अनुवाद में डिजिटल टूल की भूमिका महत्वपूर्ण : बलराम सिंह

-मैत्रेयी कॉलेज में भाषायी कौशल विकास पाठ्यक्रम का हुआ उद्घाटन

नई दिल्ली। डिजिटल टूल्स एवं भारतीय भाषाओं पर अवलम्बित त्रैमासिक प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम की शुरुआत मैत्रेयी कॉलेज में रविवार से हो गई। यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का सर्टिफिकेट कोर्स है, जिसके लिए कुछ विदेशी प्रतिभागियों के साथ-साथ भारत के 31 राज्यों के 26 सौ से भी अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण किया है। इनमें शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं इच्छुक प्रतिभागी सम्मिलित हैं।

उद्घाटन सत्र में अमेरिका से विज्ञान एवं इण्डिक स्टडीज के सुप्रसिद्ध विद्वान प्रो. बलराम सिंह, उत्कृष्ट वैयाकरण तथा महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश चन्द्र पाण्डा, दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. बलराम पाणी, मैत्रेयी कॉलेज के चेयरपर्सन सन्तोष कुमार तनेजा सहित अनेक गणमान्य लोगों ने भाग लिया। इनके अलावा हजारों अन्य प्रतिभागियों ने ज़ूम एवं यूट्यूब लाइव के माध्यम से उदघाटन सत्र में भाग लिया।

इस अवसर पर मैत्रेयी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. हरित्मा चोपड़ा ने कहा कि आज के दौर में प्रत्येक छात्र के लिए डिजिटल शिक्षा का महत्व है। विशेष रूप से भारतीय भाषाओं के अध्ययन और अनुसंधान में लगे छात्रों को ऐसे उपकरणों के साथ सशक्त बनाने की आवश्यकता है जो उन्हें भारतीय भाषाओं और अध्ययन को डिजिटल रूप से संलग्न करने में मदद करेंगा ।

वहीं, कॉलेज की प्रबंध समिति के अध्यक्ष संतोष कुमार तनेजा ने सभा को संबोधित करते हुए भारतीय भाषाओं में सीखने और सिखाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सरकार द्वारा इस दिशा में किए गए रचनात्मक प्रयासों से दर्शकों को अवगत कराया। विशिष्ट अतिथि डीन ऑफ कॉलेजेज, विश्वविद्यालय प्रो. बलराम पाणि ने अपने वक्तव्य में महामारी के वर्तमान समय में डिजिटल शिक्षा के बढ़ते महत्व को बताया। इस प्रकार उन्होंने मैत्रेयी कॉलेज द्वारा शुरू किए गए इस पाठ्यक्रम की केंद्रीयता को रेखांकित किया।

इसके साथ ही उन्नत विज्ञान संस्थान, डार्टमाउथ, यूएसए के निदेशक और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. बलराम सिंह ने उन्नत विज्ञान संस्थान द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान के बारे में दर्शकों को अवगत कराया। उन्होंने भारतीय संस्कृति और ज्ञान की परिवर्तनकारी क्षमता के बारे में बात की। साथ ही उन्होंने कहा कि आज के दौर में भारतीय भाषाओं के साथ जुड़ने की आवश्यकता पहले से भी अधिक है।

उन्होंने संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों एवं सहयोगी कार्यक्रमों के बारे में भी बात की, जिनमें से कुछ पाठ्यक्रम आयुर्वेद तथा मनोविज्ञान पर केंद्रित हैं। सत्र के अध्यक्ष और मुख्य वक्ता प्रो. आर.सी. पंडा थे जो संस्कृत व्याकरण के प्रख्यात विद्वान और महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति की केंद्रीयता और प्रत्येक के लाभ के लिए इसे आगे बढ़ाने की सामाजिक आवश्यकता के बारे में अपने विचार साझा किए।

उन्होंने भारतीय भाषाओं के अनुवाद में डिजिटल टूल द्वारा निभाई गई भूमिका पर चर्चा की, जो इस उद्देश्य को पूरा करने में मदद करती है। स्कूल ऑफ इंडिक स्टडीज, यूएसए से जुड़े डॉ. उमेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। गौरतलब है कि भाषायी कौशल विकास पर आधारित त्रैमासिक प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम की शुरुआत दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध मैत्रेयी कॉलेज एवं अमेरिका स्थित स्कूल ऑफ इण्डिक स्टडीज (इन्स्टीट्यूट ऑफ एड्वांस्ड साइंसेज) के संयुक्त तत्वावधान में की जा रही है।

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