भुलकी छतौना में बंदरों का आतंक, वन विभाग की उदासीनता से बढ़ रही है बंदरों की समस्या

-लगभग रोजाना किसी न किसी ग्रामीण को अपना शिकार बना रहे हैं बंदर

कोतवाली देहात/सुलतानपुर। भुलकी छतौना में बंदरों के कारण स्थानीय नागरिक परेशान हैं। क्षेत्र में बंदरों का आतंक इस कदर है कि लोग घर से बाहर निकलने में भी कतराने लगे हैं। रोजाना कोई न कोई ग्रामीण बंदरों का शिकार बन जाता है। वहीं, बंदरों के काटने और उत्पात करने के बाबत अनेक शिकायतें मिलने के बावजूद वन विभाग उदासीनता बरत है।

वन विभाग की लापरवाही से लोगों को अबतक बंदरों के आतंक से मुक्ति नही मिल पा रही है जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। वहीं बंदरों के आतंक का शिकार बनी बुजुर्ग महिला असगरी बेगम के पुत्र मोहम्मद जुबेर खान का कहना है कि मेरी माता को बीते 28 जनवरी को पागल बंदर ने गंभीर रूप से घायल कर दिया जिससे असगरी बेगम मरणासन्न अवस्था में पहुंच गई। इन बंदरों के आतंक की सूचना आए दिन विभाग के कर्मचारियों को दी जाती है लेकिन वन विभाग के आला अधिकारी मौन साध कर बैठे हुए हैं और बंदरों को पकड़कर शांति व्यवस्था कायम रखने में लापरवाही बरत रहे हैं।

 

मोहम्मद जुबेर खान ने बताया कि मैं जनपद न्यायालय सुल्तानपुर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर कार्यरत हूँ। लिहाजा, रोज रोज शिकायत करने वन विभाग के कार्यालय जाना संभव नही है। फिर भी मैंने बंदरों के आतंक के बाबत कई बार वन विभाग के आला अधिकारियों को सूचना दी लेकिन आला अधिकारी मेरी शिकायत पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

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