बजट 2022 में निर्मला सीतारमण से आर्थिक सुधार चाहता है उद्योग जगत

-हालांकि, एनआरआई की कई पुरानी मांगें अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। लिहाजा, अगले महीने पेश होने वाले बजट में कुछ बदलावों की उम्मीद की जा रही है

नई दिल्ली। साल 2021 के केंद्रीय बजट में अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को अफोर्डेबिल हाउसिंग के टैक्स बेनिफिट्स और इस सेगमेंट में टैक्स हॉलिडेज का फायदा देने के साथ एनआरआई की अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए भी कुछ कदम उठाए गए थे। एनआरआई को वन परसन कंपनीज (ओपीसी) शुरू करने की मंजूरी दी गई थी जिससे उनके लिए भारत में बिजनेस करना आसान हो गया। इसके अलावा कई देशों में लॉकडाउन और फ्लाइट्स बैन को देखते हुए रेजिडेंसी रूल्स भी लचीले कर दिए गए थे।

वहीं, अगर टीडीएस की बात करें तो एनआरआई के पास गुंजाइश कम ही होती है। जब वे 50 लाख रुपये से कम की प्रॉपर्टी बेचते हैं तो उन्हें दो साल से ज्यादा समय तक प्रॉपर्टी होल्ड करने पर कैपिटल गेंस पर 20 फीसदी टीडीएस देना होता है। वहीं, शॉर्ट टर्म यानी दो साल से कम समय पर कैपिटल गेंस की स्थिति में इनकम टैक्स स्लैब के तहत टीडीएस लगता है। 50 लाख रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी होने पर एलटीसीजी टैक्स (LTCG tax) पर सरचार्ज लगता है, जिससे टीडीएस रेट बढ़ जाता है।

इसी प्रकार, रेजिडेंट इनवेस्टर्स पर स्टॉक और म्यूचुअल फंड्स में कोई टीडीएस नहीं लगता है, वहीं एनआरआई को सबसे ज्यादा लागू टैक्स रेट्स पर टीडीएस देना होता है। एनआरआई इस बजट में उनके और रेजिडेंट टैक्सपेयर्स के साथ टीडीएस नियमों (TDS rules) में समानता की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, उनकी कई पुरानी मांगें अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। अगले महीने पेश होने वाले बजट में निम्नलिखित कुछ बदलावों की उम्मीद कर रहे हैं।

बेसिक छूट सीमा

एनआरआई की एक अन्य बड़ी समस्या है कि वे 2.5 लाख रुपये की बेसिक छूट सीमा के एवज में अपने कैपिटल गेंस को एडजस्ट नहीं कर सकते हैं। यदि एक रेसिडेंट का कैपिटल गेंस बेसिक छूट सीमा से कम हैं तो कोई टैक्स की देनदारी नहीं होती। हालांकि, एनआरआई को 2.5 लाख रुपये से कम इनकम होने के बावजूद कैपिटल गेंस पर पूरा टैक्स देना होता है।

निवेश की सीमा

दूसरे टैक्सपेयर की तरह, एनआरआई सेक्शन80सी के तहत 1.5 लाख रुपये और सेक्शन 80सीसीडी (1बी) के तहत एनपीएस में 50,000 रुपये के निवेश पर डिडक्शन के लिए इलिजिबल हैं। हालांकि, वह सीमित विकल्पों में ही निवेश कर सकते हैं। वे सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम, पीपीएफ अकाउंट या एनएससी या पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट में निवेश नहीं कर सकते हैं।

समान टैक्स डिडक्शंस

एनआरआई कुछ अन्य छोटे बेनिफिट चाहते हैं, हालांकि ये कुछ लोगों के लिए अहम हैं। एनआरआई भले ही विदेश में रहते हैं, लेकिन उनके यहां पर संबंधी और परिवार वाले रहते हैं। हालांकि, एनआरआई दिव्यांग आश्रितों के मेडिकल ट्रीटमेंट (सेक्शन 80डीडी), विशेष बीमारियों से पीड़ित परिजनों के ट्रीटमेंट (सेक्शन 80 डीडीबी) और खुद या आश्रित की अपंगता (सेक्शन 80यू) सहित कुछ डिडक्शन के लिए इलिजिबल नहीं हैं। इस तरह के बेनिफिट एनआरआई को भी मिलने चाहिए।

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