‘चौथी क्या, विपक्ष की दसवीं पसंद भी होता तो भी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी स्वीकार करता’ : यशवंत सिन्हा

-राष्ट्रपति चुनाव के लिए देशव्यापी प्रचार के बाबत एक प्रचार समिति का गठन, कल केरल से शुरु होगा अभियान

नई दिल्ली (संतोष सूर्यवंशी)। राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने आज संसद भवन पहुंचकर न सिर्फ अपना नामांकन दाखिल किया. बल्कि मीडिया से मुखातिब होने के लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब भी पहुंचे. यहां आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान सिन्हा ने कहा कि मैं तमाम विपक्षी दलों का शुक्रिया अदा करता हूं जो उन्होंने मुझे अपना उम्मीदवार चुना. यशवंत सिन्हा ने कहा कि मुझे बताया गया कि मैं विपक्षी दलों की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए चौथी पसंद हूं, लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि अगर मैं दसवीं पसंद भी होता तो इसे स्वीकार करता. क्योंकि ये विचारों की लड़ाई है और मैं इसमें अपना योगदान देना चाहता हूं.

यशवंत सिन्हा ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की योग्यता को लेकर कहा कि राष्ट्रपति का काम है सरकार को सलाह देना इसलिए ये ज़रूरी है कि राष्ट्रपति वो बने जो सलाह दे सके. उन्होंने कहा यदि कोई ऐसा व्यक्ति राष्ट्रपति बनता है जिसकी सरकार को सलाह देने की हिम्मत ही न पड़े तो वह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह नहीं कर पाएगा. यशवंत सिन्हा ने कहा कि ऐसे हालात में वह केवल एक रबर स्टैम्प बनकर रह जाएगा, जैसा कि हमने पहले भी देखा है.

आपको बता दें कि यशवंत सिन्हा के राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद उनके देशव्यापी प्रचार के लिए एक प्रचार समिति का भी गठन किया गया है. जिसमें कांग्रेस नेता जयराम रमेश, टीएमसी के सुखेंदु शेखर राय, सीपीआई (एम) के सीताम यचूरी, सपा के डा. रामगोपाल यादव, एनसीपी के प्रफुल पटेल, टीआरएस के रंजीत रेड्डी, आरजेडी के मनोज झा, सीपीआई के डी राजा समेत शिवसेना नेता का नाम शामिल है. आज नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद कैंपेन शुरू हो चुका है. यशवंत सिन्हा अपने प्रचार अभियान की शुरूआत कल केरल से करेंगे.

विपक्षी दलों के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने अपना नामांकन भरने के बाद बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. यशवंत सिन्हा ने कहा कि बीजेपी ने किसी को बताए बिना ही अपना कैंडिडेट घोषित कर दिया. उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च पद के लिए सरकार ने दूसरें दलों के साथ बैठक कर आम सहमति बनाने की कोशिश तक नहीं की. गौरतलब है कि यशवंत सिन्हा ने खुद को विपक्ष की चौथी पसंद इसलिए कहा क्योंकि उनसे पहले एनसीपी के शरद पवार, महात्मा गांधी के पौत्र गोपाल कृष्ण गांधी और नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला को विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की पेशकश की जा चुकी है जिसे इन तीनों ने ठुकरा दिया था.

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