मायावती को ठीक कर देंगे बजंरग बली : रामशंकर

चुनाव प्रचार में मायावती के बंजरग बली का नाम लेने पर इटावा के भाजपा उम्मीदवार का कटाक्ष

इटावा। संसदीय चुनाव में वोट हथियाने के लिए बजरंग बली और अली को लेकर भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के नेताओं के बीच जोरदार और तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर की जंयती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद इटावा संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और एससी एसटी आयोग के अध्यक्ष डा. रामशंकर कठेरिया ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर तंज कसते हुए कहा कि वोटों के समय मायावती बजरंग बली का नाम ले रही हैं, मुझे लगता है बजरंग बली मायावती को ठीक कर देंगे। मायावती की ओर से आ रहे बयान कि अली और बजरंग बली दोनों हमारे हैं। इस बयान से खासी बैचेनी देखी जा रही है।

कठेरिया का कहना है कि पांच सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में विकास का जो मॉडल बनाया है, उसके चलते उम्मीद है कि देश की जनता एक बार फिर से उनको ना केवल प्रधानमंत्री बनाएगी, बल्कि भारतीय जनता पार्टी की फिर से पूर्ण बहुमत की सरकार केंद्र में काबिज करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुशासन, राष्ट्रवाद और विकास की दिशा में काम किया है। उससे देशवासियों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। महंगाई, भ्रष्टाचार और आतंकवाद के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो मुहिम शुरू की है, उसे लंबे समय तक देश में संचालित किए जाने की बेहद आवश्यकता है। यह मुहिम तभी संचालित हो सकती है जब एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी की सरकार केंद्र मे काबिज हो और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनें। उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत की पहचान बने और भारत का मान सम्मान बढ़े, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो काम किया है, वह अतुलनीय है। उन्होंने प्रधानमंत्री के गांवों और ग्रामीणों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का भी जिक्र किया।

उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन केवल नेताओं के आपसी तालमेल का गठबंधन है। इस गठबंधन से आम मतदाता का कोई लेना देना नहीं है। चुनाव के बाद दोनों दल के प्रमुख एक दूसरे के खिलाफ मुखर होते हुए नजर आएंगे। भले ही आंकड़े उनके पक्ष में बताए जा रहे हों, लेकिन ऐसा हकीकत में नहीं है। क्योंकि दोनों दल पहले ही प्रदेशभर में आधी आधी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा बसपा गठबंधन कोई मायने नहीं रखता है। क्योंकि एक दूसरे संगठन के लोग एक दूसरे को हराने में जुटे हैं, ऐसी खबरें उनके पास में आ रही है।

उन्होंने कहा कि दोनों दल के मुखिया अपने अपने दलों के समर्थकों को तरह तरह का प्रलोभन देकर के गुमराह करते रहते हैं, लेकिन अब लोग काफी जागरूक हो चुके हैं। इसका असर 2014 के संसदीय चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में सबने देखा है। समाजवादी पार्टी मात्र 5 सीट पर सिमट गई और बहुजन समाज पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई।

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