कोरोना के चलते बढ़ा हार्ट अटैक का खतरा, रिसर्च में हुआ खुलासा

-शोध रिपोर्ट के मुताबिक भारत और चीन में सबसे तेजी से बढ़ रहे हार्ट फेल के मामले

नई दिल्ली। नोवल कोरोना वायरस रोग (कोविड-19) की चपेट में आए लोगों को इस वैश्विक महामारी ने काफी नुकसान पहुंचाया है। कोरोना लॉकडाउन की वजह से जहां लोगों के लाइफस्टाइल में बड़ा बदलाव आया है। वहीं, उसकी वजह से कई बीमारियों में बढ़ोतरी हुई है, जिनमें ब्लड प्रेशर में बदलाव की समस्या बड़े पैमाने पर उभरी है। ब्लड प्रेशर बढ़ने से लोगों में हार्ट अटैक आने का खतरा भी बढ़ा है।

हालांकि, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ये समस्या ज्यादा देखी गई है। अमेरिका के ओहियो स्थित क्लीवलैंड क्लिनिक में सेंटर फॉर ब्लड प्रेशर डिसऑर्डर के सह-निदेशक और अध्ययन के प्रमुख डॉ. ल्यूक लाफिन के मुताबिक लाकडाउन के दौरान एक्सरसाइज न करने, मोटापा बढ़ने और ज्यादा शराब पीने से भी लोगों में ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ी है। लोगों के ब्लड प्रेशर में औसतन 1.1 से 2.5 mmHg की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सर्कुलेशन ट्रस्टड सोर्स जनरल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, COVID-19 महामारी का अप्रत्यक्ष तौर पर लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ा है। लोगों में ब्लड प्रेशर बढ़ने या हाइपरटेंशन की वजह से हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ा है। वहीं हाइपरटेंशन बढ़ने से लोगों की आंखों, लिवर और दिमाग पर भी बुरा असर पड़ता है। उन्होने बताया कि अमेरिका के लगभग 47 फीसदी वयस्कों में हाइपरटेंशन की समस्या है। वहीं, 2019 में अमेरिका में लगभग पांच लाख मौतों में हाइपरटेंशन को कारण माना गया है।

इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों के एक समूह ने 2018–2020 के बीच यू.एस. में एक इम्पलाई वेलनेस प्रोग्राम के तहत लोगों के ब्लड प्रेशर का डाटा एकत्र किया। इस अध्ययन में लगभग 464,585 प्रतिभागी शामिल थे, जिनमें से 53.5% महिलाएं थीं, जिनकी 2018 में औसत आयु 45.7 वर्ष थी। वैज्ञानिकों ने 2018, 2019 में महामारी से पहले और 2020 के मार्च तक लोगों में ब्लड प्रेशर के स्तर की तुलना की। इस दौरान अमेरिका में ज्यादार अमेरिकी राज्यों ने लोगों को घर पर रहने के आदेश दिए। फिर उन्होंने इन स्तरों की तुलना महामारी के दौरान अप्रैल-दिसंबर 2020 से दर्ज किए गए लोगों के डेटा से की।

डॉ. ल्यूक लाफिन का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर से आपको दिल का दौरा या स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर है, क्योंकि आमतौर पर इसके कोई लक्षण नहीं होते हैं। अपने ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करवाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शारीरिक गतिविधि आपके ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद कर सकती है। वयस्कों को 150 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाली गतिविधि करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उदाहरण के लिए, तेज चलना या 75 मिनट की कसरत। वहीं, डॉक्टर के परामर्श के बाद रनिंग भी काफी सहायक है।

भारत और चीन में सबसे तेजी से बढ़ रहे हार्ट फेल के मामले

भारत और चीन में हार्ट फेल के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे है। भारत और चीन जैसे देशों में वायु प्रदूषण भी कार्डियोवास्कलुर रोग और सांस की बीमारी जैसे रोगों का प्रमुख कारण है। दुनिया भर में हार्ट फेल से होने वाली मौतों के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है। अकेले भारत और चीन में विश्व के 46.5 फीसदी नए मामले सामने आए हैं। यह खुलासा यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित शोध में हुआ है। लैंसेट’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के मुताबिक इस्केमिक (आईएचडी) हृदय रोग के दुनियाभर में मामलों का करीब चौथाई हिस्सा अकेले भारत में होता है।

शोध के मुताबिक 2017 में हार्ट फेल के केसों की संख्या 64.3 मिलियन थी जिसमें 29.5 मिलियन पुरुष थे जबकि महिलाओं की संख्या 34.8 मिलियन थी। रिपोर्ट के अनुसार 1990 से 2017 के बीच हार्ट फेल के मामलों में 91.9 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। अध्ययन के अनुसार 1990 से 2017 के दौरान हार्ट फेल के मामले करीब-करीब दोगुने हो गए है।

यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित शोध के अनुसार हार्ट फेल के मामले 70 से 74 साल के पुरुषों में अधिक है। वहीं, महिलाओं में 75-79 साल की उम्र में हार्ट फेल होने के मामले ज्यादा पाए गए हैं। प्रमुख बात यह है कि 70 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में पुरुषों की तुलना में हार्ट फेल के मामले ज्यादा पाए गए हैं। रिपोर्ट में बड़ी बात यह है कि हार्ट फेल के मामले 1990-2017 के दौरान चीन और भारत में सबसे अधिक बढ़े हैं। चीन में हार्ट फेल के मामले 29.9 फीसद बढ़े हैं, वहीं भारत में 16 फीसद बढ़े है। यानी सीधे तौर पर कहें तो यह एशिया में तेजी से बढ़ रहा है।

दुनिया भर में सबसे अधिक मामले इस्केमिक हार्ट रोग के होते हैं। यह कुल मामलों का 26.5 फीसद होते हैं। जबकि हाइपरसेंसिटिव हार्ट रोग और क्रानिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज कुल मामलों का क्रमश: 26.2 और 23.4 प्रतिशत होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस्केमिक हार्ट रोग, ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और एल्कोहलिक कार्डियोपैथी पुरुषों में अधिक होती है जबकि हाइपरसेंसिटिव हार्ट रोग और रयूमेटिक हार्ट रोग महिलाओं में अधिक होते हैं।

मृत्यु के 10 बड़े कारण

डब्ल्यूएचओ ने 2019 में दुनिया में होने वाली मृत्यु के 10 कारणों की रिपोर्ट जारी की थी जिसमें दिल का रोग कारण प्रमुख था। दिल की बीमारी, स्ट्रोक, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (लंबे समय तक फेफड़ों में रुकावट), श्वसन संक्रमण, नवजात को होने वाली बीमारियां व समस्याएं, श्वासनली, ब्रोन्कस और फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौत, अल्जाइमर और मनोभ्रंश, डायरिया, डायबिटीज और किडनी की बीमारियां।

लेंसेन्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस्केमिक (आईएचडी) हृदय रोग (इस्केमिक हार्ट रोग ऐसी स्थिति है जो दिल में रक्त की आपूर्ति को ‎प्रभावित करती है। रक्त वाहिकाओं को उनकी दीवारों पर कोलेस्ट्रॉल के ‎जमाव के कारण संकुचित या अवरुद्ध कर दिया जाता है। इससे हृदय की मांसपेशियों ‎में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति कम हो जाती है, जो ‎दिल की उचित कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक है। इसकी वजह से अचानक रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है , जिसके परिणामस्वरूप दिल का दौरा पड़ता है।) के दुनियाभर में मामलों का करीब चौथाई हिस्सा अकेले भारत में होता है। दिल में खून की कम आपूर्ति इस बीमारी का प्रमुख लक्षण है। इस्केमिक हृदय रोग भारतीय मरीजों में हार्ट फेलियर का मुख्य कारण है।

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