कोविड:मतदाताओं का उत्साह और नेताओं की मजबूरी बिगाड़ रही हालात, 24 घंटे में 27 मौत

-कोविड की तीसरी लहर पकड़ रही जोर, एहतियाती कदम उठाने के निर्देश

चंडीगढ़। कोविड की तीसरी लहर जोर पकड़ रही है। एहतियाती कदम उठाने पर जोर दिया जा रहा है। पंजाब में स्थिति दूसरी है।चुनाव की वजह से सख्ती बेअसर नजर आ रही है। मतदाता नाराज न हो, इसलिए नेता भीड़ का हिस्सा बनने पर मजबूर हो रहे हैं। जानते हैं , दो गज दूरी के फार्मूले से कुर्सी फिसल सकती है। इसलिए संक्रमण के हर तरह का जोखिम उठाने पर मजबूर हो रहे हैं।

अकाली दल के सीनियर लीडर प्रकाश सिंह बादल स्वयं कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी संक्रमण का शिकार हो गए थे। पंजाब में कोविड की स्थिति यह है कि 24 घंटे के दौरान 27 मौतें हो गई है, 7849 कोरोना के नए मामले भी सामने आए हैं

हेल्थ विभाग का कहना है कि अभी रैलियों पर रोक है, चुनाव आयोग भी सख्त है। भीड़ पर नजर रखी जा रही है। लेकिन इसके बाद भी जहां भी नेता जाते हैं, वहां भीड़ जाती है। पंजाब हेल्थ विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताय कि चुनाव के वक्त हम क्या कह सकते हैं? कोई बात सुन ही नहीं रहा है। पुलिस चुनाव प्रबंध देखे या फिर लोगों को मास्क के प्रति प्रेरित करे।

हमारी भी मजबूरी है, हमें समझाया गया कि इस ओर ज्यादा ध्यान न दिया जाए। यह भी एक वजह है कि पंजाब मं केस तेजी से बढ़ रहे हैं। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आएगा, वैसे वैसे संक्रमण का अंदेशा भी बढ़ सकता है।

इससे निपटने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। होना तो यह चाहिए कि नेता ही इस दिशा में पहल करें, लेकिन वह ऐसा कर नहीं रहे हैं। सीनियर लीडर तक को संक्रमण हो रहा है।यह बड़ा रिस्क है, क्योंकि इस तरह से वह संक्रमण को न सिर्फ फैला सकते हैं बल्कि खुद की जान के लिए भी जोखिम पैदा कर रहे हैं।

मेडिकल आफिसर डाॅक्टर सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि होना तो यह चाहिए कि पंजाब के नेता खुद मास्क बांटे, जिस तरह से पहले बिल्ले और झंडे बांटे जाते थे, मतदाताओं के बीच प्रचार के दौरान नेता मास्क बांटे तो यह अच्छा प्रयोग हो सकता है।लेकिन नेता शायद ही इस ओर ध्यान देंगे। क्योंकि उनके एजेंडे में हेल्थ नहीं बस वोट है। यह स्थिति नेता और उसके मतदाता दोनो के लिए जान का जोखिम जरूर है।

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