दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के अतिक्रमण पर रोक के आदेश की नगर निगम की तरफ से उड़ाई गयी धज्जियां क्यो नही रुका डेमोलेशन

 

रिपोर्ट : रवि डालमिया

दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में फेल रहे अतिक्रमण पर बीजेपी से दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता के आदेश अनुसार हटाया गया एंक्रोचमेंट। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी चलता रहा नगर निगम का पीला पंजा। नगर निगम की इस कार्यवाही से स्थानीय लोग नाराज इतने बड़े स्तर पर जहाँगीरपुरी इलाके में फैला हुआ अतिक्रमण को लेकर नगर निगम ही अब सवालों के घेरे में है। हनुमान जयंती पर हिंसा के बाद जहांगीरपुरी में अवैध रूप से फैले हुए अतिक्रमण पर नगर निगम का पीला पंजा चला लेकिन कहीं ना कहीं इस बड़ी कार्यवाही के पीछे भाजपा शासित नगर निगम की बदले की भावना छिपी हुई नजर आ रही है। क्योंकि यह अतिक्रमण आज कल या परसों का नहीं बल्कि 20 साल से ज्यादा पुराना है और लगातार सड़कों पर अतिक्रमण इस तरीके से फैलाया गया था कि सड़कों से निकलना लोगों का दुश्वार हो गया लेकिन हनुमान जयंती पर हुई हिंसा के बाद भाजपा एक्शन मोड में आई और शाम को आर्डर दिया और सुबह कर दिया डेकोरेशन। आखिर हिंसा से पहले ही क्यो नही हटाया गया ये अतिक्रमण ।

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से डेमोलेशन पर रोक के आदेश के बाद भी अतिक्रमण पर नगर निगम की तरफ से रोक नहीं

नगर निगम की तरफ से यहां 9 बुलडोजर बुलाए गए तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सुरक्षा के लिए लिहाजे से पंद्रह सौ से ज्यादा सुरक्षा बल पुलिस कर्मी तैनात किए गए। नगर निगम वह दिल्ली पुलिस के तमाम बड़े आला अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और सुबह के 10 बजते ही अतिक्रमण की प्रक्रिया को शुरू किया गया। यहा डेमोलेशन जिस तरीके से किया जा रहा था कहने कहीं उसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है जो दो समुदायों के बीच में हनुमान जयंती पर हिंसा हुई उसी का बदला लिया जा रहा हो क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से डेमोलेशन पर रोक के आदेश के बाद भी अतिक्रमण पर नगर निगम की तरफ से रोक नहीं लगाई गई और डेमोलेशन को तेजी से बढ़ा दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर एंक्रोचमेंट हटाने ही था तो पहले क्यों नहीं हटाया गया। हिंसा की 4 दिन बात ही एंक्रोचमेंट हटाने के लिए नगर निगम का दस्ता मौके पर पहुंच गया और तमाम दुकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इनमें कुछ गरीब लोगों का समान था जो मलबे में दबकर बेकार हो गया और कई लाख रुपए का नुकसान यहां रहने वाले गरीब मजदूर बेसहारा लोगों का हुआ। अब इन लोगों को डर सता रहा है कि उनकी यह भरपाई कैसे हो पाएगी एंक्रोचमेंट को इनकरेजमेंट के तरीके से यदि हटाया जाता तो इनकरेजमेंट भी हटता और यहां रहने वाले खास विशेष धर्म के लोगों का नुकसान भी नहीं होता।

मस्जिद के बाहर बनी हुई तमाम अनऑथराइज्ड दुकानों को तोड़ा

तस्वीरों में आप देख सकते हैं जहां पर हिंसा शुरू हुई उस मस्जिद के बाहर बनी हुई तमाम अनऑथराइज्ड दुकानों को तोड़ दिया गया है। जहां वर्षो पुरानी यहां पर दुकानें बनी हुई थी उन दुकानों को जमींदोज कर दिया गया है। लेकिन कहीं ना कहीं जो मस्जिद की गेट की दीवारें थी उनको भी तोड़ा गया। जिसके बाद यहां रहने वाले लोग नगर निगम की इस कार्यवाही से नाराज दिखाई दिए। उनका कहना है कि यदि इनको इनकरेजमेंट हटाना था तो 1 या 2 दिन का इंटीमेशन इनको देना चाहिए था जिससे यहां रहने वाले लोग अपना तमाम सामान निकाल ले लेकिन कहीं ना कहीं हम जान माल की हानि पहुंचाने के चलते नगर निगम ने पीला पंजा चलाया और इनको सामान हटाने की परमिशन नहीं दी। यह कारवाही सुबह से शाम तक चली और किस तरीके से डोनेशन को हटाया गया तस्वीरों में आपको देख रहे हैं जेसीबी उसे बड़ी बड़ी दुकान है मकान वह तीन थप्पड़ हटा दिए गए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कई घंटों के बाद उनके नियम का पालन करने के चलते एमसीडी के अधिकारी शांत हुए और अपना डेमोलेशन करते रहे।

नगर निगम की बड़ी कार्यवाही हिंसा के चार दिन बाद अतिक्रमण हटाया

दिल्ली के अंदर यह पहली ऐसी नगर निगम की बड़ी कार्यवाही हिंसा के चार दिन बाद ही देखने को मिली अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिए और अतिक्रमण हटाया भी गया। इस तरह की तस्वीरें कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों से सामने नजर आई थी। जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पीला पंजा अवैध निर्माण पर चल रहा है या जिन लोगों ने दंगा फैलाया और जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई के चलते उन्हीं लोगों से भाजपा से उत्तर प्रदेश से मुख्यमंत्री योगी आदिनाथ ने की। उसी तरीके से दिल्ली के जहांगीरपुरी में भी तस्वीरें सामने नजर आ रही हैं। फिलहाल यह कार्यवाही आगे बढ़ेगी या नहीं यह तो कल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही साफ हो पाएगा लेकिन कहीं ना कहीं जितनी तेजी से नगर निगम ने आज अतिक्रमण को हटाने की तेजी दिखाइए यदि यह पहले दिखाई होती तो आज यहां इतने बड़े लेवल पर एंक्रोचमेंट नहीं फैलती जरूरत है इंक्रोचमेंट किस तरीके से फैली इस पर नगर निगम के अधिकारियों की जांच भी होनी चाहिए ।

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