विदेश व्यापार नीति को 31 मार्च 2021 तक विस्तार देने की घोषणा की

ईपीसीएच ने पीएम केयर फंड में दिया 25 लाख का अंशदान

– कर्मचारियों ने भी दिया एक दिन का वेतन

नई दिल्ली/ ग्रेटर नोएडा। हस्तशिल्प निर्यातकों की मदद करने एवं और वर्तमान संकट की चुनौतियों का सामना करने के लिए देशभर के निर्यातकों और हस्तशिल्प संगठनों ने हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद को प्रत्यावेदन भेजे हैं। परिषद ने वित्त मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और उद्योग एवं कपड़ा मंत्रालय समेत सर्वोच्च स्तर पर इन प्रत्यावेदनों को पहुंचाया। ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार ने बताया कि इन चिंताओं को लेकर परिषद ने केंद्रीय मंत्री वाणिज्य एवं उद्योग पीयूष गोयल से दो बर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मीटिंग की।

राकेश कुमार ने बताया कि भारत सरकार ने हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के प्रत्यावेदनों पर संज्ञान लेते हुए विदेश व्यापार नीति 2015-2020 को एक साल के लिए 31 मार्च 2021 तक विस्तार दे दिया है। इसके साथ ही विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) समेत सभी योजनाओं को विस्तार मिल गया है।

उन्होंने बताया कि इस विस्तार के जरिए विदेश व्यापार नीति की सभी निम्नलिखित योजनाएं इस अवधि तक जारी रहेंगी। डीजीएफटी (महानिदेशक विदेश व्यापार) ने विदेश व्यापार नीति 2015-2020 और हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर 2015-2020 को 31 मार्च 2020 से बढ़ाकर 31 मार्च 2021 तक विस्तार दे दिया है। विदेश व्यापार नीति की एमईआईएस, एडवांस आथराइजेशन, डीएफआईए, ईपीसीजी, डीम्ड एक्सपोर्ट समेत सभी योजनाओं को 31 मार्च 2021 तक विस्तार मिल गया है। एमईआईएस के ऐसे शिपमेंट, जिनके लेट निर्यात आर्डर एक फरवरी से 31 मई 2019 तक के हैं, अब उनके एप्लीकेशन भरने के लिए 15 महीने का समय दिया जा रहा है। सामान्य समय सीमा 12 महीने की थी। स्टेटस होल्डर सर्टिफिकेट के वैधता 30 जून 2020 तक बढ़ा दी गयी है। अग्रिम प्राधिकार (एडवांस ऑथराइजेशन), जहां प्राधिकार की वैधता या एक्सपोर्ट ऑबलिगेशन सीमा एक फरवरी 2020 से 31 जुलाई 2020 तक समाप्त हो रही थी, उन्हें समयसीमा से छह महीने का विस्तार अब स्वत: ही मिल जाएगा।

उन्होंने बताया कि डीएफआईए ऑथराइजेशन, जहां प्राधिकार की वैधता 1 फरवरी 2020 से 31 जुलाई 2020 तक समाप्त हो रही थी, उन्हें समयसीमा से छह महीने का विस्तार अब स्वत: ही मिल जाएगा। ईपीसीजी ऑथराइजेशन – जहां प्राधिकार की वैधता 1 फरवरी 2020 से 31 जुलाई 2020 तक समाप्त हो रही थी, उन्हें समयसीमा से छह महीने का विस्तार अब स्वत: ही मिल जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया है कि महानिदेशक विदेश व्यापार यानी डीजीएफटी के आंचलिक प्राधिकरण भी 30 सितंबर 2020 तक किसी इंसेंटिव या प्राधिकार के लिए आवेदकों से अब ईपीसी द्वारा जारी वैध आरसीएमसी पर जोर नहीं देंगे (उन मामलों में जहां पर वैधता 31 मार्च या इससे पहले समाप्त हो रही है)। श्री कुमार ने कहा कि निर्यातकों को संकट के समय राहत पहुंचाने वाले भारत सरकार के इन कदमों से हस्तशिल्प निर्यातक समुदाय का मनोबल बढ़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की पहल से संकट के समय फंसे लोगों को राहत मिलेगी और वो अपना विस्तार कर सकेंगे।

राकेश कुमार ने बताया कि हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद ने पीएम केयर फंड में 25 लाख रुपये का अंशदान किया है। इसके साथ ही ईपीसीएच के कर्मचारियों ने अपना एक दिन के वेतन का भी इस फंड में योगदान किया है, जिससे भारत सरकार इस महामारी में गरीब और जरूरतमंदों को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा और सहायता दे सके।

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