Ganga Dussehra 2021: आज मनाया जा रहा है गंगा दशहरा, जानें मां गंगा की पूजन विधि

पूरे देश में आज गंगा दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हर साल भारतवर्ष में गंगा दशहरा पावन पर्व मनाया जाता है.

पूरे देश में आज गंगा दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हर साल भारतवर्ष में गंगा दशहरा पावन पर्व मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है मां गंगा का धरती पर अवतरण इसी दिन हुआ था. इस पावन दिन पर गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व है. आज के दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान करने से मनुष्य को 10 तरह के पापों से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही इस दिन गंगा नदी में स्नान करने के बाद दान-पुण्य करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

ये दस पाप होते हैं नष्ट

आज के दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान करने से 10 तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं. इनमें हिंसा, पर स्त्री गमन, कटु वचन बोलना, बिना अनुमति के दूसरे की वस्तु देना, झूठ बोलना, निष्प्रयोजन बातें करना, पीछे से बुराई या चुगली करना, दूसरे के अनिष्ट का चिंतन करना,  दूसरे की वस्तु को अन्याय पूर्ण ढंग से लेने का विचार रखना, नास्तिक बुद्धि रखना जैसे 10 पाप शामिल है.

हालांकि कोरोना वायरस के कारण इस बार गंगा नदी में स्नान करना संभव नहीं है इसलिए आप अपने घर में रहकर पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें. स्नान करते समय आप मां गंगा का ध्यान जरूर करें. मां गंगा की इस दिन विधि- विधान से पूजा- अर्चना करने से आफके उपर मां गंगा की विशेष कृपा बनती है. मां गंगा को प्रसन्न करने के लिए श्री गंगा चालीसा का पाठ आप जरूर करें.

गंगा दशहरा के दिन ऐसे करें मां गंगा की पूजा

मां गंगा पूजा के लिए सबसें पहले आप ब्रह्म मुहूर्त में उठें, उसके बाद अगर आप गंगा नदी के पास रहते हैं तो उसमें स्नान करें, अन्यथा पास के किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अगर ये भी संभव न हो तो जल में गंगा जल मिलाकर घर पर ही स्नान करें. फिर आप व्रत का संकल्प लें. इसके बाद षोडशोपचार विधि से मां गंगा की विधि पूर्वक पूजा करें. नाम मंत्र से भी यह पूजा किया जा सकता है. पूजा के दौरान आप ‘ओम गं गंगायै नमः’ मंत्र का जाप करें.मां गंगा की पूजा करने के बाद उन्हें पृथ्वी पर अवतरित करने वाले भगीरथजी तथा हिमालय का भी पूजन करें. अंत में दस ब्राह्मणों को दस-दस मुट्ठी अनाज एवं अन्य वस्तुएं दान करें. जल और सत्तू का इस दिन दान करना चाहिए. अगले दिन व्रत का पारण करें.

 

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