घर-घर सर्वे कर खोजे जाएंगे एमआर से वंचित पांच वर्ष तक के बच्चे

- सर्वे के लिए आशा-एएनएम को दिया गया प्रशिक्षण

अभिषेक ब्याहुत/ अमर सैनी

नोएडा। खसरा और रूबेला (एमआर) से बचाव के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत जनवरी, फरवरी और मार्च में तीन चरणों में पांच वर्ष तक के बच्चों को मीजल्स रूबेला (एमआर) के दो टीके लगाए जाएंगे। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सुनील शर्मा ने दी।

 

उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं उप जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. उबैद ने बताया कि शासन के निर्देश पर नौ से 20 जनवरी, 2023 तक विशेष टीकाकरण अभियान का प्रथम चक्र चलेगा। द्वितीय चक्र 13 से 24 फरवरी, 2023 और तृतीय चक्र 13 से 24 मार्च, 2023 तक संपन्न होगा। इससे पहले टीकाकरण के लिए तैयारियां की जा रही हैं। आशा-एएनएम घर-घर जाकर सर्वे के बाद एमआर वैक्सीन से वंचित पांच वर्ष तक के बच्चों की ड्यू  लिस्ट तैयार करेंगी। ब्लॉक स्तर पर आशा-एएनएम को सर्वे के लिए प्रशिक्षण दिया गया जा चुका है। डॉ. उबैद ने बताया कि खसरा से बचाव के लिए अब पांच वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। टीकाकरण के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में सर्वे कर टीकाकरण से छूटे पांच वर्ष तक के बच्चों की ड्यू लिस्ट तैयार की जाएगी। उसके बाद माइक्रो प्लान तैयार कर जनवरी, फरवरी और मार्च में विशेष टीकाकरण सत्र आयोजित किए जाएंगे। खसरा से बचाव के लिए मीजल्स-रूबेला (एमआर) विशेष टीकाकरण अभियान मिशन इंद्रधनुष की तर्ज पर चलेगा। बच्चों को खसरा होने का खतरा ज्यादा रहता है। डा. उबैद  ने बताया कि 19 से 24 दिसंबर तक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), एएनएम और ब्लॉक स्तरीय पर्यवेक्षक सर्वे का वैलीडेशन करेंगे। पूरा डेटा ई-कवच पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। विशेष टीकाकरण अभियान के लिए राज्य स्तर पर प्रतिरक्षण अधिकारियों की बैठक होगी। इस बैठक में विशेष अभियान की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। जनवरी के पहले सप्ताह में ब्लॉक व जनपद स्तर पर टास्क फोर्स एवं अंतर्विभागीय बैठक होगी।

 

 

प्रवासी लोंगों के नियमित टीकाकरण में आती है दिक्कत

डा. उबैद का कहना है कि विभाग की पूरी कोशिश होती है कि कोई भी बच्चा नियमित टीकाकरण से वंचित न रह जाए, लेकिन इस कार्य में प्रवासी लोगों खासतौर पर श्रमिक वर्ग के साथ दिक्कत आती है। कई बार देखा गया है कि इन लोगों के बच्चों को पहला टीका तो समय पर लग जाता है लेकिन जब दूसरे टीके का समय आया तो परिवार वह जगह छोड़ कर कहीं और चला गया होता है। इन लोगों को खोज पाना मुश्किल होता है। कई बार तो यह शहर छोड़कर ही चले जाते हैं।

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