ग्लोबल सेंटर फार ट्रेडिशनल मेडिसिन भारत के लिए हो सकता है गेम चेंजर : डब्ल्यूएचओ निदेशक

-भारत सरकार ने पिछले महीने गुजरात के जामनगर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन की स्थापना के लिए डब्ल्यूएचओ के साथ होस्ट कंट्री एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे हस्ताक्षर

नई दिल्ली। ग्लोबल सेंटर फार ट्रेडिशनल मेडिसिन (GSTM) भारत के लिए गेंम चेंजर साबित होगा। यह बात विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्षेत्रीय निदेशक डाक्टर पूनम खेत्रपाल सिंह ने गुजरात के जामनगर में कहीं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक दवाएं सदियों से चली आ रहीं हैं। गौरतलब है कि डब्ल्यूएचओ के 194 सदस्य देशों में से 170 देशों के लगभग 80 प्रतिशत लोग उनका उपयोग करते हैं। डाक्टर सिंह ने कहा कि उनके व्यापक उपयोग के बावजूद, पारंपरिक चिकित्सा में मजबूत सबूत, डेटा और मुख्यधारा के स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली में उनके एकीकरण को रोकने वाले मानक ढांचे की कमी है।

उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ का ग्लोबल सेंटर फार ट्रेडिशनल मेडिसिन डेटा और एनालिटिक्स, स्थिरता और इक्विटी, नवाचार और प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करके और पारंपरिक चिकित्सा के प्राचीन ज्ञान और शक्ति का उपयोग करने और एसडीजी 3 लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए एक गेम-चेंजर हो सकता है। स्वास्थ्य सुनिश्चित करने और सभी उम्र के लोगों के लिए भलाई को बढ़ावा देने के लिए भी यह बेहद खास है।

डाक्टर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डाक्टर टेड्रोस घेब्रेयसस से बात की और भारत में जीसीटीएम की स्थापना और मेजबानी के लिए भारत की उत्सुकता व्यक्त की ताकि दुनियाभर से पारंपरिक चिकित्सा की क्षमता का दोहन किया जा सके।

भारत सरकार ने पिछले महीने गुजरात के जामनगर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फार ट्रेडिशनल मेडिसिन की स्थापना के लिए डब्ल्यूएचओ के साथ ‘होस्ट कंट्री एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका अंतरिम कार्यालय गुजरात में आयुर्वेद में प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान में है।

डाक्टर सिंह ने कहा कि भारत सरकार ने पहले दस वर्षों के लिए जीसीटीएम की स्थापना और इसकी गतिविधियों का समर्थन करने के लिए उदारतापूर्वक सहमति व्यक्त की है। यह देखते हुए कि कोरोना महामारी दुनियाभर में स्वास्थ्य प्रणालियों को खींच रही है और प्रभावित कर रही है। डाक्टर सिंह ने बताया कि कई देशों ने महामारी से उबरने और एसडीजी 3 लक्ष्यों की दिशा में प्रगति में तेजी लाने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों को जुटाने की आवश्यकता महसूस की है।

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