हर चीज का अर्थ खोजने से अच्छा कार्य है, परमार्थ खोजना : पंडित गौरांगी

-राम नाम जपने वाला किसी का शोषण ना करें, भरत की तरह पोषण करे

सुल्तानपुर। रामायण कालीन धार्मिक एवम पौराणिक स्थल कुश भगवनपुर जिसे सुल्तानपुर के नाम से भी जाना जाता है। यहां स्थित अखण्डनगर विकास खंड के बछेड़िया गांव में बुधवार को रामकथा का विराम दिन था।अयोध्या से आई अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचिका पंडित गौरांगी ने आज कथा के आरंभ में गीतावली रामायण से शिव पार्वती के एक प्रसंग के संदर्भ में कहा कि हर चीज की अर्थ खोजने से अच्छा है। उसमें से परमार्थ खोजा जाए क्योंकि राम परमार्थ के रूप हैं, राम संकीर्ण नहीं है।

 

उन्होने कहा कि रामायण में महाराज दशरथ के चारों पुत्रों के नामकरण विधि को तुलसीदास जी ने मानों राम नाम जपने वालों के लिए एक प्रक्रिया बताई है। उन्होने कहा है कि राम नाम जपने वाला किसी का शोषण ना करें, भरत की तरह पोषण करे, शत्रुघ्न की तरह शत्रु बुद्धि का नाश करें और लक्ष्मण की तरह सबका आधार बने।

 

पंडित गौरांगी ने करुणा से भरे आर्द्र वचनों से कहा कि इस सृष्टि में कोई भी चेतना को भीख मांगना अच्छा नहीं लगता। मजबूरी और परिस्थितियों के शिकार हुए लोगों के प्रति हमारा कर्तव्य है कि जिसके पास जो क्षमता हो उसमें से दशांश का दान करें : क्षमता चाहे पैसे की हों, बुद्धि की हों या पद-प्रतिष्ठा की हों। गरीबी हटाओ की बातें बहुत हुई, फिर भी, अभी भी बहुत गरीबी है। वस्तु की गरीबी कभी नहीं होनी चाहिए, स्वभाव की गरीबी होनी चाहिए। भौतिकता की केवल आलोचना करने से या गरीबी हटाने की बड़ी-बड़ी आध्यात्मिक बातें करने से कुछ नहीं होगा। जो धरा पर हैं, उनको भौतिकता जरूरी है। सरकार भी करें, हमसभी भी करें। कोई नहीं करेगा तो काल करेगा, काल का काल महाकाल, महादेव करेगा।

इस तरह हम सब से जुड़े और वृत्ति के रूप में सेतुबंध को सार्थक करें। स्थूल रूप में रामसेतु बने या ना बने, राम राज्य में एक दूसरे के बीच प्रीति का सेतु बना था, वैसा प्रीति का सेतु बन जाएं तो भी बहुत है। आज यह, मैं कोई प्रासंगिक घटना देखकर नहीं बोल रही हूं, मेरी 7 साल की कथा-कथन में,पहले से ही मेरा स्टैंड यही था और आज भी है। मैं राम-नाम और राम-काम दोनों कर रही हूँ।

 

वहीं, कथा समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे अखण्डनगर ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि जय बाबू उपाध्याय ने व्यास जी की पीठ पर पुष्प अर्पित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कथा वाचिका पण्डित गौरांगी जी अपनी कथा को जान डाल कर सींची है और यह बेल आज फलती-फूलती दृष्टिगोचर हो रही है।

 

राम कथा के श्रवण से समाज में मानवीय भाव की बढ़ोतरी होती है जिससे सच्चे अर्थों में जीवन को सार्थकता मिलती है। कादीपुर विधायक राजेश गौतम ने लोगों को बताया कि धर्म कर्म से समाज मे शांति व्यवस्था कायम होती है जिससे देश तीव्र गति से विकास के पथ पर अग्रसर होता है,जिला पँचायत सदस्य वार्ड नम्बर 3 पिंकु शुक्ल ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये सभी को धन्यवाद दिया और कहा कि सभी के अहयोग से सम्पन्न होने वाले कार्य को ईश्वर भी सराहना करते हैं। गिधौना प्रधान और जिला पँचायत प्रत्याशी अभय सिंह ने सभी को इसी प्रकार भेदभाव मुक्त कार्य करने की सराहना की।

 

पुनः कथा वाचिका पण्डित गौरांगी ने मंच का संचालन करते हुए कहा कि रामेश्वर भगवान की स्थापना करके वहां उपस्थित समाज को निमित्त बनाकर रामजी ने विश्व को मैसेज दिया कि जो शिव को मानेगा और मेरी निंदा करेगा या मुझे मानेगा और शिव की निंदा करेगा, उसकी दुर्गति होगी। यह शैवों और वैष्णवों के बीच सेतु था। मेरे देश का पक्षी चाहता है कि सेतुबंध हो, मेरे देश का ऋषि चाहता है कि सेतुबंध हो, मेरे देश का महादेव चाहता है कि सेतुबंध हो।

 

बछेड़िया की यह कथा को पण्डित गौरांगी जी ने ऐतिहासिक और आध्यात्मिक, स्थूल और सूक्ष्म, दोनों के बीच का सेतु कहा। हर एंगल से कथा सफल रही, सुफल रही। आज, रामकथा के विराम के दिन, पण्डित गौरांगी ने रामकथा के प्रसंगों से गुजरते हुए, प्रत्येक प्रसंग में से सेतुबंध का सूक्ष्म दर्शन कराया। इस कथा के सुचारु आयोजन और सेवा के राम-कार्य की सराहना करते हुए, बड़ी प्रसन्नता के साथ गौरांगी ने कहा कि इस कथा ने बहुत सारी स्मृतियों की नींव डाली है।

 

गत 11 फरवरी को सामुहिक हवन व 12 फरवरी को विशाल भण्डारे के आयोजन जसमे 7 हजार लोगों की व्यवस्था की गई है अतः यहाँ आये लोग सपरिवार आये और अपने नजदीकी लोगों को भी भण्डारे में महा भोग प्रसाद ग्रहण करने के लिये लिवा लाये। कार्यक्रम के दौरान रामलीला समिति के सदस्य दीपक तिवारी, संदीप तिवारी, राजन तिवारी, रोमी तिवारी, सचिन तिवारी, आलोक तिवारी, विवेक मिश्र, हरिओम तिवारी, हर्ष तिवारी, राहुल तिवारी आदि मौजूद रहे।

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