हिमाचल प्रदेश में केसर व हींग उपजाएंगे स्थानीय किसान

-देश में केसर की वार्षिक मांग करीब 100 मीट्रिक टन, मगर औसत उत्पादन होता है लगभग 6-7 मीट्रिक टन

नई दिल्ली, 9 जून (TSN)। केसर और हींग का उत्पादन बढ़ाने के लिए देश में कल्चर लैब की स्थापना की जाएगी। इसके लिए वैज्ञानिक एंव औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने हिमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायो-रिसोर्स टेक्नोलॉजी (आईएचबीटी) के साथ साझेदारी करने के लिए हाथ मिलाया है। यह साझेदारी हिमाचल प्रदेश में कृषि आय बढ़ाने, आजीविका में बढ़ोतरी करने और ग्रामीण विकास के उद्देश्य को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती है। 
किसानों को दी जाएगी तकनीकी जानकारी 
सीएसआईआर-आईएचबीटी, किसानों को केसर व हींग के बारे में तकनीकी जानकारी मुहैया कराने के साथ-साथ राज्य कृषि विभाग के अधिकारियों एवं किसानों को प्रशिक्षित भी करेगा। इस पहल के तहत भावी किसानों और कृषि विभाग के अधिकारियों को क्षमता निर्माण, नवाचारों के हस्तांतरण, कौशल विकास और अन्य विस्तार गतिविधियों का लाभ मिल सकता है। वहीं, सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ संजय कुमार का कहना है कि अगर केसर और हींग की पैदावार बढ़ती है तो इनके आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के गैर-परंपरागत क्षेत्रों में केसर उत्पादन
राज्य में केसर और हींग के क्रमशः घनकंद और बीज उत्पादन केंद्र भी खोले जाएंगे। वर्तमान में जम्मू और कश्मीर में करीब 2,825 हेक्टेयर क्षेत्र में केसर की खेती होती है। सीएसआईआर-आईएचबीटी ने केसर उत्पादन की तकनीक विकसित की है, जिसका उपयोग उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के गैर-परंपरागत केसर उत्पादक क्षेत्रों में किया जा रहा है। संस्थान में रोग-मुक्त घनकंद के उत्पादन के लिए टिश्यू कल्चर प्रोटोकॉल भी विकसित किए गए हैं।
देश में 100 टन केसर और 1200 टन हींग की सालाना मांग
गौरतलब है कि केसर और हींग का भारतीय व्यंजनों में सदियों से उपयोग किया जाता रहा है। इसके बावजूद देश में इन दोनों ही कीमती मसालों का उत्पादन सीमित है। भारत में, केसर की वार्षिक मांग करीब 100 मीट्रिक टन है, लेकिन हमारे देश में इसका औसत उत्पादन लगभग 6-7 टन ही हो पाता है। इस कारण हर साल बड़ी मात्रा में केसर का आयात करना पड़ता है। इसी तरह, भारत में हींग उत्पादन भी नहीं है और हर साल 600 करोड़ रुपये मूल्य की लगभग 1200 मीट्रिक टन कच्ची हींग अफगानिस्तान, ईरान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों से आयात करनी पड़ती है।
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