हिंदुओं की सुरक्षा के मामले में शेख हसीना सरकार पूरी तरह नाकाम : इंद्रेश कुमार

-संघ नेता ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के त्योहार के समय पूर्व नियोजित साजिशों के तहत पूजा घरों और अल्पसंख्यकों पर आक्रमण की दुनियाभर में होनी चाहिए कड़ी निंदा 

नई दिल्ली। बांग्लादेश में मंदिर पर हुए हमले की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कड़ी निन्दा करते हुए सख्त कार्यवाई की मांग की है। संघ के वरिष्ठ नेता एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुख्य संरक्षक इंद्रेश कुमार ने घटना की भर्त्सना करते हुए कहा है कि बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार को तत्काल प्रभाव से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कठोर शब्दों में कहा कि हसीना सरकार को अपने देश में अल्पसंख्यकों पर हमला बंद करवाना चाहिए। संघ नेता ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदुओं के त्योहार के समय पूर्व नियोजित साजिशों के तहत पूजा घरों और अल्पसंख्यकों पर आक्रमण किए जाते हैं जिसकी दुनियाभर में कड़ी निंदा की जानी चाहिए।

 

संघ नेता ने इस मामले में भारत सरकार से दखल देने की मांग की है तथा कांग्रेस और अन्य सभी विपक्षी दलों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि सभी को धर्म और जाति की राजनीति से ऊपर उठकर बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं पर हुए हमलों की निंदा करनी चाहिए। साथ ही पड़ोसी देशों पर इस तरह के अत्याचारों पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए दबाव बनाने में भारत सरकार के साथ शामिल होना चाहिए।इस दौरान इंद्रेश कुमार ने मुस्लिम समाज से हमले की निंदा करने का आह्वान भी किया।

 

संघ नेता ने कहा कि नवरात्रे और दुर्गा पूजा के समय भी हिंदुओं के पूजा स्थलों को काफी बड़े पैमाने पर तोड़ने और जलाने का काम किया गया था एवं अनेकों हिंदुओं के घरों और व्यापारों को छति पहुंचाई गई थी।  संघ नेता ने इन सब कृत्यों के लिए शेख हसीना सरकार को दोषी ठहराया है।

 

संघ नेता ने कहा कि जिस प्रकार आए दिन पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुस्लिम देशों में अल्पसंख्यकों पर हमले होते हैं वो चिंताजनक और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की आजादी के समय 1971 में हिंदुओं की संख्या लगभग 29 प्रतिशत थी जो अब मात्र 9 प्रतिशत रह गई है। बांग्लादेश के 20 प्रतिशत हिंदू लगातार होते हमले के कारण देश छोड़ने पर मजबूर हुए हैं और यही कारण है कि भारत सरकार को CAA और NRC लाने की जरूरत पड़ी।

 

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच और भारतीय क्रिश्चन मंच के मुख्य संरक्षक ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों पर काम कर रही संस्था AKS का हवाला देते हुए बताया कि पिछले 9 साल में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को 3679 बार हमलों का सामना करना पड़ा, जो काफी चिंताजनक और अक्रोशित करने वाला है। उन्होंने बताया कि इस दौरान 1678 मामले धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ और हथियारबंद हमलों के सामने आए हैं। संघ नेता ने कड़ी निन्दा करते हुए कहा कि बांग्लादेश सरकार की मिली भगत के कारण घरों-मकानों में तोड़-फोड़ और आगजनी समेत हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर लगातार हमले किए जा रहे हैं।

 

संघ नेता ने कहा कि ढाका के वारी में 222 लाल मोहन साहा स्ट्रीट में स्थित इस्कॉन राधाकांता मंदिर में गुरुवार शाम जो हमला हुआ था वो एक तरह का आतंकवाद ही है। यह हमला हाजी सैफुल्लाह की अगुआई में 200 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने किया था। मंदिर में तोड़फोड़ और लूट की गई। इंद्रेश कुमार ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है, जब बांग्लादेश में हिंदुओं या मंदिरों पर हमला हुआ है.. पिछले साल नवरात्रि पर हिंदुओं के खिलाफ अफवाह फैलाकर दुर्गा पूजा पंडालों और हिंदुओं के घरों पर हमले कर के करीब 200 घरों को जला दिया गया था। इसके अलावा ढाका में स्थित ISKCON मंदिर पर भी हमला किया गया था।

 

इंद्रेश कुमार ने कहा कि अल्पसंख्यकों के ऊपर जिस तरह भय की राजनीति की जा रही है उसके लिए सीधे तौर पर बांग्लादेश की सरकार दोषी है। अन्यथा हिंदुओं की आबादी में 20 प्रतिशत की गिरावट नहीं आती। संघ नेता ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमला करना, मंदिर तोड़ना, लूटपाट करना, लोगों को मौत के घाट उतार देना। इस तरह से जान माल को नुकसान पहुंचाने की साजिश बिना सरकार के शह पर नहीं हो सकती है। इंद्रेश कुमार ने पाकिस्तान की भी निंदा करते हुए कहा कि वहां की सरकार भी अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में नाकाम रही है।

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