मुलायमी होली में हुआ बंटवारा, शिवपाल ने जमाई अलग महफिल

- होली के महापर्व पर भी दिखा कुनबे का ‘मतभेद’

दिनेश शाक्य 

इटावा। सारे देश में चर्चा के केंद्र में रहने वाली सैफई की मुलायमी होली अब दो खेमों में बट गई है। एक खेमे में जहां मुलायम सिंह यादव के भाई प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन कर चुके शिवपाल सिंह यादव हैं, तो दूसरी ओर मुलायम सिंह यादव के पीछे उनके बेटे अखिलेश यादव, भाई रामगोपाल यादव और परिवार के तमाम छोटे-बड़े राजनीतिक और गैर राजनीतिक सदस्य खड़े दिखाई दे रहे हैं।

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन कर चुके शिवपाल सिंह यादव ने अपनी महफिल अपने पिता सुघर सिंह के नाम पर बनाए एसएस मेमोरियल स्कूल में मनाया। वहां शिवपाल सिंह यादव के साथ उनकी पार्टी के तमाम छोटे बड़े नेता भी मौजूद थे। शिवपाल यादव के बेटे और पीएसपी के महासचिव आदित्य यादव, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के कानपुर मंडल के प्रभारी पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य, पार्टी के महासचिव पूर्व विधायक मानिकचंद यादव, पूर्व विधायक सुखदेवी वर्मा, सैफई के पूर्व ब्लॉक प्रमुख अरविंद यादव, मैनपुरी के अध्यक्ष वोट सिंह यादव, इटावा अध्यक्ष सुनील यादव, पीएसपी की युवा इकाई के प्रदेश महासचिव फरहान शकील, युवा नेता नितिन कोहली समेत कई प्रमुख लोग शिवपाल की होली के जश्न में शामिल हुए। लेकिन, पीएसपी के गठन से पहले यह सभी शिवपाल के साथ मुलायमी होली का हिस्सा बनते रहे हैं। इस दफा बंटवारा होने पर इन सभी ने मुलायमी होली से शिवपाल की तरह दूरी बनाने में ही भलाई समझी। 

अब बात आती है मुलायम की होली में शिवपाल सिंह यादव के कट्टर समर्थक और प्रगतिशील पार्टी के महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाने वाले ठाकुर भोला सिंह और पूर्व एमएलसी सुभाष चंद्र यादव की। इन्होंने शिवपाल सिंह यादव की होली में शामिल होने के बजाय मुलायम होली में हिस्सा लेना ज्यादा मुनासिब समझा। मुलायम सिंह यादव ने इन दोनों को तरजीह दी और अपने बगल में कुर्सी पर बैठाया।

ठाकुर भोला सिंह, मुलायम सिंह यादव के पुराने करीबियों में से एक हैं और इसी वजह से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन करने के बाद शिवपाल सिंह यादव ने इनके यहां दस्तक दी थी। उसके बाद उनको प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का सदस्य भी बना दिया गया, लेकिन भोला सिंह की किसी भी समारोह में हिस्सेदारी नहीं देखी गई। मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु नत्थू सिंह यादव के बेटे ने ही मुलायम सिंह यादव को जसवंतनगर विधानसभा से पहली दफा अपनी सीट पर चुनाव लड़ाने की रजामंदी दी थी, जिसके बाद मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक जन्म विधायक बनकर हुआ।  

होली के जश्न के बाद शिवपाल सिंह यादव सैफई गांव में अपने बेटे आदित्य के साथ घूमे। बहुतेरे लोगों से उन्होंने मुलाकात की। शिवपाल अपने बडेÞ भाई अभयराम यादव के आवास पर भी गए और उनसे आशीर्वाद लिया। अभयराम यादव बदांयू से सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के पिता हैं। 

शिवपाल भले ही मुलायमी आंगन में खुलेआम सबके सामने होली के जश्न में शामिल ना हुए हों, लेकिन गुरुवार की सुबह वह अपने बड़े भाई नेताजी मुलायम सिंह यादव से होली के मौके पर आशीर्वाद लेने उनके सिविल लाइन स्थित आवास पर जा पहुंचे। वहां बंद कमरे में दोनों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। नेताजी से मुलाकात के बाद शिवपाल सिंह यादव ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि वो अपने भाई मुलायम सिंह यादव से आशीर्वाद लेने के लिए आये थे। 

जीवन में जोश और उमंग पैदा करने वाले रंग के पर्व होली के मौके पर मुलायम कुनबा अपने आंगन में एक साथ जमा हुआ करता था, वह आज पूरी तरह से अलग-थलग नजर आया। मुलायम के आंगन में होली के जश्न में जहां खुद मुलायम, अखिलेश, राम गोपाल, धर्मेद्र, तेजप्रताप, अभिषेक, अनुराग और कार्तिकेय दिखाई दिए, वहीं शिवपाल अपने समर्थकों के साथ एसएस मेमोरियल में रहे।

लंबे अरसे से अपने भतीजे अखिलेश यादव से वैचारिक मतभेद के चलते प्रगतिशील समाजवदी पार्टी का गठन कर चुके शिवपाल सिंह यादव ने होली के मौके पर इस दफा एक नई इबारत लिख डाली। उन्होंने अपने पिता सुधर सिंह के नाम पर स्थापित एसएस मेमोरियल स्कूल में होली का जश्न अपने समर्थकों के साथ में मनाया। जबकि इससे पहले शिवपाल सिंह यादव मुलायमी आंगन में होली का जश्न मनाने आते रहे हैं। हालांकि पिछले दिनों खुद मुलायम सिंह यादव बीमार होने के कारण होली के मौके पर इस जश्न में शामिल नहीं हो सके थे। तब अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव एक मंच पर थे, लेकिन दोनों के समर्थकों के बीच में नारेबाजी के चलते गर्माहट भी देखी गई। तब अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में इस बात की दुहाई देते हुए कहा था कि व्यक्ति विशेष के नारे लगाने से पार्टी कभी मजबूत नहीं होती है। अगर पार्टी को मजबूत करना है तो समाजवादी पार्टी और नेताजी जिंदाबाद के नारे कार्यकर्ता और समर्थक लगाएं। असल में शिवपाल सिंह यादव के होली जश्न में पहुंचने के दरम्यान उनके समर्थक शिवपाल सिंह जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे, जिस कारण अखिलेश यादव ने इस तरह का बयान देकर पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश देने की कोशिश की थी।

बेशक शिवपाल सिंह यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन करके अपनी अलग रहा चुन ली हो, लेकिन अभी तक उन्होंने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। शिवपाल सिंह यादव अपनी परंपरागत जसवंतनगर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी से विधायक हैं।

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