इस बार आम आदमी की पहुंच से दूर रहेगा ‘आम’

- मौसम के बदलाव के कारण कमजोर हुई आम की फसल, आम आदमी के लिए खास रहेगा आम

बुलंदशहर (अवनीश त्यागी)। फलों का बादशाह कहा जाने वाला आम इस बार आम आदमी की पहुंच से दूर रहेगा। बड़े शहरों से लेकर विदेशों में धूम मचाने वाले बुलंदशहर के स्याना फल पट्टी क्षेत्र की मशहूर दशहरी , लंगड़ा और चौसा आम की फसल पर इस बार समय से पहले तापमान बढ़ने के कारण संकट के बादल छाए हैं। शरद ऋतु के तुरंत बाद मौसम में बदलाव होने के कारण आम की फसल कमजोर हो गई है। स्याना फल पट्टी क्षेत्र के आम बागानों में जमकर बोर आने के बावजूद फल नहीं बन सके हैं । मार्च और अप्रैल महीने में तापमान अधिक बढ़ जाने के कारण इसका असर आम बागानों पर पड़ा है। समय से पहले ही अधिक गर्मी होने के कारण बोर का परागण नहीं हो सका है।

दरअसल, तापमान अधिक होने के कारण परागण कराने में सहायक मित्र कीटों ने बोर से दूरी बनाए रखी, जिसका असर फसल पर पड़ा। परागण नहीं होने के कारण बोर में अंडा नहीं पड़ा जिससे फलों का विकास ही नहीं हुआ है। फल पट्टी क्षेत्र में मात्र 30 से 35 प्रतिशत फसल होने का अनुमान है। फसल के कमजोर होने के कारण आम उत्पादकों से लेकर व्यापारी और आढ़ती दुविधा में है। देश के बड़े शहरों और विदेश से आम की भारी मांग होने के बावजूद अभी तक कोई अनुबंध नहीं हुआ है ।

चिंतित है फल पट्टी क्षेत्र के आम उत्पादक

स्याना फल पट्टी क्षेत्र में फसल कमजोर रहने के कारण आम उत्पादक भारी चिंता में हैं। साल भर कड़ी मेहनत और खर्च करने के बाद भी मात्र 35 से 40 प्रतिशत फसल होने का अनुमान है। जिले के बड़े आम उत्पादक व प्रगतिशील किसान केदारनाथ त्यागी, आफाक उर्र रहीम खान, राकेश त्यागी, हसरत चौधरी , सीताराम अग्रवाल, सचिन त्यागी, चौधरी ऋषि पाल सिंह आदि ने बताया कि इस बार कमजोर है । आम बागानों में मात्र 35 से 40 प्रतिशत फसल बची है।

दुविधा में कंपनी, आम निर्यात करने के लिए नहीं हुआ अनुबंध

स्याना फल पट्टी क्षेत्र से गत वर्षो में हजारों कुंतल आम जापान और अन्य देशों में निर्यात हुआ है। लेकिन फसल के कमजोर रहने के कारण इस बार आम एक्सपोर्टर दूरी बनाए हुए हैं। जापान को सबसे अधिक आम निर्यात करने वाली कंपनी मिश्रा एक्सपोर्टर्स लिमिटेड के मालिक राज मिश्रा ने बताया कि इस बार फसल कमजोर होने के कारण विदेश से अभी कोई अनुबंध नहीं किया है ।

अप्रैल माह में गर्मी ने बनाया रिकॉर्ड

जून और जुलाई में पड़ने वाली गर्मी ने इस बार मार्च और अप्रैल महीने में ही रिकॉर्ड बना दिया। 2 महीने पहले गर्मी और लू के चलते तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से पार हो गया। तापमान के अधिक बढ़ने कारण असर आम बागानों पर पड़ा है ।

अधिक गर्मी के कारण बोर में नहीं हुआ परागण

लखनऊ स्थित केंद्रीय अनुसंधान रहमानखेड़ा के वैज्ञानिक प्रोफेसर डॉ पीके शुक्ला ने बताया कि शरद ऋतु में मौसम के अनुकूल रहने के कारण इस बार आम वृक्षों पर जमकर बोर आया । लेकिन समय से पहले ही अधिक गर्मी पड़ने के कारण इसका असर बोर पर पड़ गया। मार्च और अप्रैल माह में तेजी से तापमान बढ़ने के कारण बोर में फल सेट नहीं हुए। प्रोफेसर डॉ पीके शुक्ला ने बताया कि इसका मुख्य कारण परागण कराने में सहायक मित्र कीट अधिक गर्मी होने के कारण वृक्षों से दूरी बनाए रहे। परागण नहीं होने के कारण वृक्षों पर फल बनने के बजाय छोटे दाने बनकर झड़ गए। प्रोफेसर ने बताया कि सबसे ज्यादा असर आम की अगेती फसल दशहरी पर पड़ा है।

कोट
स्याना फल पट्टी क्षेत्र में इस बार आम की फसल कमजोर हैं । समय से पहले ही तापमान अधिक होने के कारण फल पट्टी क्षेत्र में दशहरी किस्म 30 से 35 प्रतिशत, लंगड़ा और चौसा 40 से 50 प्रतिशत पैदावार होने की संभावना है। आम के फलों का साइज और रेट अच्छे रहने के कारण आम उत्पादकों को मुनाफा होगा।
-एनके सहानी, जिला उद्यान अधिकारी, बुलंदशहर

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