जहांगीरपुरी हिंसा क्या दिल्ली को दहलाने की साजिश है या महज़ कोई दुर्घटना?

जहांगीरपुरी हिंसा क्या दिल्ली को दहलाने की साजिश है या महज़ कोई दुर्घटना?

रिपोर्ट: राकेश रावत

जहांगीरपुरी में शनिवार को हनुमान जयंती के मौके पर हुई हिंसा में पुलिस ने अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दर्जनों लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है। इसके अलावा पुलिस पर फायरिंग करने वाले आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसकी पहचान असलम के रूप में हुई है। पुलिस ने असलम से वारदात में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर लिया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह कोई सुनियोजित षडयंत्र है या फिर कोई हादसा, जिसका जवाब मिलना अभी बाकी है।

हनुमान जयंती की यात्रा में खलल डाला

राजधानी दिल्ली की सड़कों पर खुलेआम तलवारे लहलहाते लोग और अल्लाह हु अकबर, नारा ए तकबीर के नारे लगाने वाले ये वही दंगाई है जिन्होंने शनिवार को हनुमान जयंती की यात्रा में खलल डाला और भीड़ पर हमला करके जातीय दंगो का रंग देने की कोशिश की। ये लोग कौन है और कहां से आये है ये तो जांच के बाद ही लेता चल पाएगा लेकिन इनका असली मकसद दिल्ली को एक बार फिर से दंगो की आग में झोकना जरूर हो सकता है।
दरअसल जब शाम को साढ़े छह बजे शोभायात्रा निकल रही थी। जब यात्रा जहांगीरपुर के सी ब्लॉक में जामा मस्जिद के पास पहुंची तभी अंसार नाम का एक आदमी अपने चार-पांच साथियों के साथ पहुंचा और शोभा यात्रा में शामिल लोगों से बहस करने लगा। इसके बाद ही विवाद बढ़ गया और पत्थरबाजी शुरू हो गई। हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने गोली भी चलाई जो एक एसआई को लगी। पुलिस के अनुसार ये गोली असलम नाम के शख्स ने चलाई थी, जिससे पिस्तौल भी बरामद की गई है।

इस हिंसा में 8 पुलिसकर्मियों समेत करीब 9 लोग घायल हुए है जिन्हें बाबू जगजीवन राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जिन 15 लोगों की गिरफ्तारी हुई है उसमें असलम भी शामिल है। असलम पर पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज है।

दिल्ली पुलिस के एसआई मेदालाल जख्मी हो गए

सड़क पर भागते लोगो को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उपद्रवी अब हिंसा पर उतर आए है और पत्थरबाजी करने के दौरान ये बदहवास लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे है। पुलिस ने हिंसा काबू करने के लिए 40-50 आंसू गैस के गोले भी छोड़े लेकिन भीड़ की तरफ से फायरिंग भी जारी रही जिसमे दिल्ली पुलिस के एसआई मेदालाल जख्मी हो गए, उनके बाएं हाथ में गोली लगी है जबकि 6-7 पुलिसकर्मी और एक आम आदमी को भी गंभीर चोटें आई हैं। इतना ही नहीं उपद्रवी भीड़ ने वहां खड़े वाहनों में आग लगा दी।

साथ ही दर्जनों वाहनों में तोड़फोड़ भी की

साथ ही दर्जनों वाहनों में तोड़फोड़ भी की। पुलिस को हिंसा से जुड़े 100 वीडियो भी मिले हैं। वीडियो के जरिए आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच की टीम मामले की जांच में जुट गई है. जांच इस दिशा से की जा रही है कि क्या ये हिंसा साजिश के तहत की गई या फिरजातीय झगड़े के बाद अचानक से हुई। इस हिंसा में कौन-कौन लोग भीड़ को उकसाने में शामिल थे, पत्थर, तलवारे और डंडों को कहां से लाया गया इसकी भी पुलिस जांच कर रही है। सीसीटीवी और वायरल वीडियो से कुछ लोगों की पहचान की गई है, जिनकी गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे हैं। जांच के लिए क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल की 10 टीमें बनाई गई हैं।

जहांगीर पुरी इलाके में ज्यादातर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम रहते है

जहांगीर पुरी इलाके में ज्यादातर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम रहते है। उनमें ज्यादातर लोग अपराध मे शामिल है। पुलिस आये दिन इन लोगो पर कार्यवाही तो करती है लेकिन पुलिस के पास ऐसी कोई योजना नहीं है जो वह इन लोगों से निपट सकें । नॉर्थ वेस्ट और वेस्ट दिल्ली में सबसे ज्यादा सेंधमारी और लूटपाट भी यहीं के लोग करते हैं।सब पुलिसकर्मियों को जहांगीरपुरी इलाके के बारे में पता है यहां पर समय-समय पर कार्रवाई भी होती है लेकिन फिर भी यहां से अपराध पूरी तरह से खत्म नहीं हो पा रहा है। इस दंगे में एक बात तो तय है कि यह अचानक से हुआ हादसा नही है बल्कि कोई रची हुई साज़िश लगती है। इसका खुलासा तो जांच के बाद ही हो पायेगा लेकिन अब पुलिस की सतर्कता और निगरानी ही ऐसे दंगो से आम लोगों को बचा सकती है और कड़े कदम उठाकर दंगाइयों को मैसेज दे सकती है कि अगर दोबारा ऐसी घटना हुई तो उसको अंजाम देने वाले सलाखों के पीछे होंगे।

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