[]◆जय माता महागौरी दिवस : दुर्गा महाअष्टमी◆[]

-मां महागौरी की पूजा करने से पाप धुल जाते हैं, मन और शरीर शुद्ध हो जाता है, भक्तों के अपवित्र व अनैतिक विचार भी नष्ट हो जाते हैं

आज नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है, आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप माता महागौरी हैं, माता महागौरी का रंग अत्यंत गौरा है इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। सनातन मान्यता के अनुसार अपनी कठिन तपस्या से मां ने गौर वर्ण प्राप्त किया था, तभी से इन्हें उज्जवला स्वरूपा महागौरी, धन ऐश्वर्य प्रदायिनी, चैतन्यमयी त्रैलोक्य पूज्य मंगला, शारीरिक मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली माता महागौरी का नाम दिया गया।

●महागौरी देवी मंत्र:
श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

●महागौरी की आराधना:
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥
श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बर धरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

●देवीमां का स्वरूप:
मां दुर्गा की आठवीं शक्ति देवी महागौरी है, इनका स्वरूप अत्यंत सौम्य है, मां गौरी का ये रूप बेहद सरस, सुलभ और मोहक है, देवी महागौरी का अत्यंत गौर वर्ण हैं, इनके वस्त्र और आभूषण आदि भी सफेद ही हैं, इनकी चार भुजाएं हैं, महागौरी का वाहन नन्देश्वर यानि बैल है, देवी के दाहिने ओर के ऊपर वाले हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है, बाएं ओर के ऊपर वाले हाथ में डमरू और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है, इनका स्वभाव अति शांत है।

●पूजा का महत्व:
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा करने से सभी पाप धुल जाते हैं, जिससे मन और शरीर हर तरह से शुद्ध हो जाता है, देवी महागौरी भक्तों को सदमार्ग की ओर ले जाती हैं, इनकी पूजा से अपवित्र व अनैतिक विचार भी नष्ट हो जाते हैं।

देवी दुर्गा के इस सौम्य रूप की पूजा करने से मन की पवित्रता बढ़ती है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ने लगती है, देवी मां महागौरी की पूजा करने से मन को एकाग्र करने में मदद मिलती है।

इनकी उपासना से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं, नवरात्र में वेसै तो कुवारी कन्याओं को भोजन कराने का विधान है परंतु अष्टमी के दिन का विशेष महत्व है, इस दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं।

देवी गौरी की पूजा का विधान भी पूर्ववत है अर्थात जिस प्रकार सप्तमी तिथि तक आपने मां की पूजा की है उसी प्रकार अष्टमी के दिन भी देवी की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए, देवी का ध्यान करने के लिए दोनों हाथ जोड़कर इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
देवी के इस रूप की प्रार्थना करते हुए देव और ऋषिगण कहते हैं,
सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते।

नवरात्रि के दौरान अष्टमी व नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इन दो विशेष लाभ होता है, माता सुख-समृद्धि व निरोग रहने का आशीर्वाद देती है. अष्टमी तिथि 2022 आज पर माता महागौरी के अलावा कन्या पूजन की भी परंपरा होती है, जिसके बिना अष्टमी की पूजा अधूरी मानी जाती है।

●विधि, शुभ मुहूर्त व महत्व: नवरात्रि अष्टमी पूजा विधि: वैष्णव जनो को अष्टमी के दिन कन्या पूजन करनी चाहिए, इसके लिए सुबह स्नानादि करके भगवान गणेश व महागौरी की पूजा अर्चना करें, फिर 9 कुंवारी कन्याओं को घर में सादर आमंत्रित करें, उन्हें सम्मान पूर्वक आसन पर बिठाएं, फिर शुद्ध जल से उनके चरणों को धोएं, तदुपरांतअब तिलक लगाएं, रक्षा सूत्र बांधें और उनके चरणों में पुष्प भेंट करें।

अब साफ थाली में उन्हें पूरी, हलवा, चना आदि का भोग लगाएं, भोजन के बाद कुंवारी कन्याओं को मिष्ठान व अपनी क्षमता अनुसार द्रव्य, कपड़े समेत अन्य चीजें भेट करें, अंतिम में उनकी आरती करें या चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें, फिर संभव हो तो सभी कन्याओं को घर तक जाकर विदा करें।

जय माता दी।

■आचार्य डा. संजीव मेरठ रत्न, ज्योतिष एवं वास्तु सलाहकार

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