कोलकाता: मशहूर दुर्गा पिंडल मे दिखेगा लखीमपुर मे मारे गए किसानो की झलक

कोलकाता दुर्गा पिंडल मे किसानो की कहानी

कोलकाता में हर साल सजने वाला दुर्गा पंडाल पूरे देश में आकर्षण का केंद्र होता है। हर साल भव्य मूर्ति के साथ इस पंडाल की रौनक ही कुछ और होती है परंतु इस साल कुछ अलग है इस पिंडल में मूर्ति के अलावा लखीमपुर में मारे गए किसानों को दिखाया जा रहा है। यह पंडाल कह रही है किसानों की दास्तां। कृषि कानून के खिलाफ जंग लड़ रहे किसानों के शहीद होने की कहानी सुना रहा है यह पिंडाल।

कया खास है इस साल पिंडाल मे

कोलकाता का मशहूर पंडाल इस साल किसान आंदोलन को दर्शाने जा रहा है यह तो अपने आप में एक खास बात है ही परंतु किस प्रकार यह किसान आंदोलन को डर जाएगा आइए आपको बताते हैं— शहर के उत्तरी किनारे में दमदम पार्क भारत चक्र पंडाल के प्रवेश द्वार पर किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ट्रैक्टर की विशाल प्रतिकृति उनके संघर्ष को दर्शाती है।

फुटपाथ पर एक कार और उसके रास्ते पर लेटे हुए एक किसान का स्केच है जिस पर बांग्ला में एक पंक्ति लिखी गई है – “मोटरगाड़ी उड़े, धुलो नीचे पोड़े चाशिगुलो”, जिसका अर्थ है कि कार धूल का एक गुबार छोड़ती है, किसान इसके पहियों के नीचे गिरते हैं।

इस पंडाल में नजर आ रहा है कि सैकड़ों चप्पलें जमीन पर पड़ी हैं, जो विरोध के दृश्यों का प्रतीक है। ये बताता है कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई लोगों के जूते वहीं रह गए। मुख्य पंडाल को छत से लटके धान की प्रतिकृतियों से सजाया गया है।

इसे बनाने वाले कलाकार अनिर्बान दास ने पीटीआई को बताया कि आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के नाम विशाल ट्रैक्टर पर कागज की चिट पर लिखे गए हैं। इसमें पंख भी लगे हुए हैं। अनिर्बान कहते हैं कि पंख बंधन से मुक्त होने की इच्छा का प्रतीक हैं।

पंडाल में लगे एक पोस्टर में लिखा नजर आता है- हम किसान हैं, आतंकवादी नहीं, किसान अन्न सैनिक हैं। पूजा कमेटी के सचिव प्रतीक चौधरी ने कहा हैं कि हम किसानों के शोषण को दिखाना चाहते हैं।

लखीमपुर में जिस तरह के किसानो को आंदोलन के दौरान कार से कुचलकर मार डाला गया इस पर पूरे देश में आक्रोश है लेकिन बहरी सरकार हर बात को अनसुना कर रही है ऐसे में अगर किसी पंडाल में किसानों की कहानी देश तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाई है तो वह बेहद सराहनीय है।

Comments are closed.