क्रांतिकारियों के साथ अंग्रेजों के अत्याचारों का महत्वपूर्ण दस्तावेज है ये पुस्तक : प्रधान

-हम देश के लिए मरने वाले नहीं बल्कि देश के लिए जीने वाले बनेंगे : भैया जी जोशी

नई दिल्ली। देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारियों की शहादत पर लिखी पुस्तक का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी के कन्वेंशन सेंटर में किया। इस पुस्तक का लेखन न्यायमूर्ति एस. एन. अग्रवाल ने किया है।

इस समारोह का आयोजन भारत विकास परिषद ने आज़ादी के अमृतमहोत्सव कार्यक्रम के तहत किया था। इस पुस्तक में न्यायमूर्ति अग्रवाल ने ब्रिटिश शासन के दौरान ब्रिटिश शासकों द्वारा ब्रिटिश क़ानूनों की धज्जियाँ उड़ाने से लेकर भारत को आज़ाद कराने में जुटे क्रांतिकारियो के साथ अत्याचार और असहनीय प्रताड़ना करने जैसे कृत्यों का विस्तार से उल्लेख किया है। इसके साथ ही क्रांतिकारियों के साहस, वीरता, देशभक्ति, पराक्रम व शहादत से मिली आज़ादी की मिसाल को भी वर्णित किया है।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा, जैसे कानून की स्थापना करने में दस्तावेज का विशेष महत्व होता है। वैसे ही आजादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों के साथ हुए अत्याचारों के बाबत यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिसमें तमाम अत्याचारों और प्रताड़नाओं का तथ्यात्मक उल्लेख है। प्रधान ने अलग- अलग काल खंडो में देश की उन्नत संस्कृति और सभ्यता का वर्णन करने के साथ बताया कि कैसे हमारे देश ने समय- समय पर समस्त जगत को सदाचार और सदाशयता के प्रति प्रेरित किया।

वहीं, भैयाजी जोशी ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में बताया कि आज़ादी के संघर्ष का बीज 1857 में बोया गया और कश्मीर से कन्याकुमारी तक सभी साधारण जनमानस ने एक सैनिक की भाँति इस संघर्ष में भाग लिया जो विश्व में अनूठा उदाहरण है। इस संघर्ष को महान क्रांतिकारियों ने अपने बलिदान से सींचा और 90 वर्षो बाद 1947 में जाकर देश को आज़ादी मिली। भारत हमेशा से अपने चिंतन, व्यवहार, सभ्यता में अग्रणी रहा है और इस विचार ने ही अब तक भारत को कितने ही आक्रान्ताओं और षड्यंत्रों से सुरक्षित रहा है।

उन्होंने कहा कि आज इस अमृतवर्ष में हम सबको अपने युवा शक्ति के बल पर देश को आगे ले जाना है और आने वाली चुनौतियों से संघर्ष करने के लिए युवाओ को दिशा देनी है। हमारा इतिहास महातपस्वियो और शोधकर्ताओं का रहा है और संस्कारो के माध्यम से ही आने वाले समय में हम देश के लिए मरने वाले नहीं बल्कि देश के लिए जीने वाले बनेंगे और एक जीवंत भारत को भविष्य की पीढ़ी के लिए तैयार करेंगे। इस अवसर पर भारत विकास परिषद के संगठन मंत्री सुरेश जैन एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्याम शर्मा भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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