महिला डॉक्टर की लापरवाही के चलते नवजात शिशु की मौत

अप्रशिक्षित स्टाफ ने गर्भवती को तड़पता देख कराया प्रसव

अभिषेक ब्याहुत 

नोएडा: सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में चिकित्सक की लापरवाही से नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला डॉक्टर के नींद से न जागने के कारण अप्रशिक्षित स्टाफ ने गर्भवती को तड़पता देख प्रसव किया। जहां समय पर उपचार न मिलने से नवजात की मौत हो गई। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने लेबर रूम में घुसकर हंगामा किया।
जानकारी के अनुसार छलेरा निवासी अर्चना को प्रसव पीड़ा होने पर शुक्रवार रात जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। शनिवार रात करीब 12 बजे प्रसव पीड़ा बढ़ गई। इस दौरान लेबर रूम में मौजूद स्टाफ ने प्रसव के लिए ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर को नींद से जगाया तो उन्होंने प्रसव से इंकार कर दिया। प्रसव पीड़ा बढ़ते ही गर्भवती तड़पने लगी। महिला को बचाने के लिए वहां मौजूद दो अप्रशिक्षित वार्ड आया एक हजार रुपए में प्रसव कराने को राजी हुई। गर्भवती महिला ने रात 2:28 बजे एक बच्ची को जन्म दिया। समय से इलाज नहीं मिलने के कारण नवजात की मौत हो गई। स्टाफ ने लापरवाही छिपाने के लिए जबरन उनसे हस्ताक्षर कराने चाहे, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बाद में स्टाफ ने बच्ची की हालत गंभीर बताते हुए उसे चाइल्ड पीजीआई रेफर कर दिया, लेकिन वहां चिकित्सकों ने नवजात को मृत बताया, जिसके बाद परिजन लेबर रूम पहुंचे और हंगामा किया।
परिजनों ने सीएमएस से की जांच की मांग
उधर, इस मामले में अस्पताल की स्टाफ नर्स सपना सोलंकी, पूजा राठौर और संगीता ने रात्रि ड्यूटी में तैनात डॉ. अजय राणा पर खिलाफ गंभीर आरोप लगाते सीएमएस से शिकायत की है। परिजनों ने कहा कि प्रसव के बाद बच्ची की हालत बिगड़ने पर रेफर स्लिप पर हस्ताक्षर कराने के लिए डाक्टर को उठाया, तो उन्होंने दरवाजा नहीं खोला और अपने कमरे में सोती रही। किसी तरह स्टाफ खुद ही रेफर स्लिप तैयार करके आनन-फानन में बच्ची को चाइल्ड पीजीआइ रेफर किया। जहां इलाज शुरू होने से पहले उसकी मौत हो गई। इस बात से नाराज परिजनों ने अस्पताल में खूब हंगामा किया। उन्होंने मामले में सीएमएस से सहीं जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।

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