मेहताब बाग का तिराहा बना अराजक तत्वों का अड्डा

-शाम ढलते ही सजती है महफ़िलें, शाम को महिलाओं व लड़कियों को निकलने में लगता है डर

आगरा,(राजेश तौमर)। जनपद आगरा के मेहताब रोड की गिनती वीआईपी रोड़ में होती है। जहां से रोजाना देशी-विदेशी पर्यटक सैकड़ों की संख्या में गुजरते है।हालांकि, कोरोना संक्रमण के चलते तमाम ऐतिहासिक स्मारकों में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। लेकिन प्रतिबंध हटने के बाद पर्यटकों की अधिकांश संख्या मेहताब बाग से ही गुजरेगी। जिससे शहर की छवि धूमिल होने की संभावना बनी हुई है।

दरअसल, महताब बाग में रेलवे की खाली जमीन पर व सड़क के किनारे लोगो ने कब्जा कर लिया है। इन लोगो ने बांस- बल्लियों की आड़ में दुकानें खोल ली हैं जो अतिक्रमण का मामला बनाता है। वही इन दुकानों पर शाम ढलते ही अराजक तत्वों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है और फिर शराब की महफिलों का दौर शुरू होता है। व शराब के नशे में ये लोग गाली गलौज के साथ रोड़ से गुजरती महिलाओं व लड़कियों पर फब्तियां कसते है व अश्लील इशारे करते है जिस कारण शाम होते ही महिलाएं व लड़कियां यहां से गुजरने से डरती है।

रात के अंधेरे में होती है लूटपाट

यहां रात के अंधेरे में रोड़ से गुजरने बाले लोगो से आएदिन लुटपाट होती रहती है। बता दे कि इस मार्ग से सुशील नगर,घड़ी चांदनी,गौतम नगर,कछपुरा, अब्बास नगर नगला देवजीत के रहने बाले अधिकांश निवासी मजदूरी व फैक्ट्रियों में काम करते है जिनमे महिलाएं भी काम करने जाती है। अक्सर करके लोग काम करके देर रात तक लौटते है। आसपास के ही कुछ अराजक तत्व के नशेबाज लोग अपने नशे की पूर्ति के लिए राह गुजरते लोगो को भय दिखा कर इनसे पैसे मांगते है न देने पर चाकू आदि दिखा कर इनसे पैसे छीन फरार हो जाते है।

रेलवे की जमीन पर बनी झुग्गियों में रहने वाले लोग करते है वारदात

सूत्रों की माने तो यहां रेलवे की खाली जमीन पर कब्जा कर झोपड़ी व डेरे बाले लोग दिन में चमड़े के हंटर,ढोलक,लोहे का काम करते है।व रात के अंधेरे में यही लोग अपने नशे व जरूरतों की पूर्ति के लिए राहगीरों से रुपये पैसे छीन कर भाग जाते है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि इन्ही लोगो मे से कुछ लोग घरों से छोटी मोटी चोरियां भी करते है।

रेलवे के जर्जर क्वार्टर है इनके ठिकाने

रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूरी पर रेल विभाग के दर्जनो क्वार्टर कई सालों से जर्जर स्थिति में खड़े है। जर्जर होने के कारण विभाग ने लोगों से क्वार्टर खाली करवा लिये है। जिसके बाद से इन क्वार्टरों को रेल विभाग ने अब तक तोड़ा ही नहीं है। नतीजतन यहां रोज शाम ढलते ही नशेड़िया व असामाजिक तत्वों की महफिल जम जाती है। इससे इन जर्जर खाली पड़े क्वार्टरों के आसपास रहने वाले रेलकर्मियों तथा उनके परिवारों का आए दिन इन नशेड़ियों तथा असामाजिक युवकों से किसी न किसी बात पर अनबन होती रहती है। रेलवे कर्मचारी भी अपनी सुरक्षा को लेकर हमेशा परेशान रहते हैं।

जर्जर खाली पड़े क्वाटर में हुई थी हत्या

बता दे कि बिगत पिछले महीने में खाली पड़े रेलवे क्वाटर्र मे एक अधेड़ व्यक्ति की हत्या कर शव को फंदे पर लटका दिया था। इसके बावजूद रेल विभाग के अधिकारी जर्जर क्वार्टरों पर मुंह खोलने से कतरा रहे हैं।

खाली क्वाटरों में आपत्तिजनक जनक सामानो का ढेर

जर्जर व खाली पड़े क्वाटरों के अंदर अगर नजर मारी जाए तो इन क्वाटरों में शराब की खाली बोतलों के साथ साथ आपत्तिजनक जनक बस्तुओं का ढेर लगा है। इन सामानों को देखकर अनुमान लगाना व कहना गलत नही होगा कि इन क्वाटरों में कुछ गलत कार्य भी होते हैं जो भविष्य में किसी बड़ी अमानवीय तथा घृणित वारदात की ओर इशारा कर रहे हैं। सुनसान जगह व खाली पड़े इन क्वाटरों को अराजक तत्व गलत कार्यो के लिए इस्तेमाल करते है।

जिम्मेदारी निभाए प्रशासन

रेल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जर्जर होकर खाली पड़े क्वार्टरों को चिह्नित कर अविलंब तोड़ कर नया क्वार्टर बनाए। इससे नशेड़ियों तथा असामजिक युवकों का अड्डा बंद होने के साथ कवाटर्र पाने से वंचित कर्मचारियों को क्वार्टर मिल सकेगा।

क्या कहते हैं क्षेत्रवासी

यहां के निवास करने बाले क्षेत्रवासियों से बात चीत करने पर बताया कि इन खाली क्वाटरों से अराजकता का माहौल बना रहता है व हर वक्त भय बना रहता है।

यहां छोटे बच्चे कि बच्चियां असुरक्षित है काम पर जाने के बाद हर वक्त बच्चों की फिक्र लगी रहती है। व बच्चों को यहां से जाने की मना कर रखी है अकेले बच्चियों के साथ कभी भी कोई अनहोनी की आशंका बनी रहती है।

सुनसान जगहों पर पहले भी शहर में हो चुकी है वारदाते

जैसा कि विदित है कि शहर में सुनसान जगहों पर बच्चियों के साथ दर्जनो ऐसी घटनाएं हुई है। ऐसे अराजक तत्वो के लिए टूटे फूटे मकान व क्वाटर बड़े है सेफ होते है जहां ये बारदात को अंजाम देते है।

रेलवे के खाली मैदान पर सजती है जुए की महफ़िल

यमुनाब्रिज रेलवे स्टेशन के लाइन पार रेलवे स्कूल के सामने खाली पड़े मैदान में खड़ी झाड़ियों व टूटे हुए क्वाटरों में दोपहर की कड़ी धूप के सन्नाटे में आसपास के युवक झुंड बना कर झाड़ियों व टूटे क्वाटरों की ओट में जुआ खेलते है जिनमे से एक युवक को पुलिस आदि की जानकारी देने के लिए खड़ा कर देते है जैसे ही पुलिस या 112 की गाड़ी आती दिखती है तो पहले से खड़ा युवक उनको सतर्क कर देता है और सभी झुंड से निकल तितर बितर हो जाते है औऱ गाड़ी निकलते ही फिर से झुंड बना जुआ खेलने में मशगूल हो जाते है।

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