मुस्लिम परिवार तैयार करता है रावण,कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले,कोरोना की मार से नही बचे रावण

 

रिपोर्ट-नितिन चौधरी

दशहरे पर रावण,मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया जाता है । भगवान राम हिंदुओं के आस्था के प्रतीक है और दशहरा हिंदुओ का त्योहार है लेकिन मुस्लिम भी इसमे अपनी भागेदारी निभाते है।तीन पीढ़ियों से एक परिवार रामलीला में दशहरे के दिन जलने वाले रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले तैयार करता है।दादा की चलाई रीति को आज पोते भी निभा रहे है और ग्रेटर नोएडा में रावण व अन्य पुतले तैयार कर रहे है।वही इस बार कोरोना की मार से रावण भी नही बच पाए है कोरोना की वजह से रावण व अन्य पुतलों की लंबाई कम हो गयी।करीब 20 फिट से ज़्यादा लम्बाई को घटा दिया गया है।

रामलीला में दशहरे के दिन अहंकार और बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन होता

रामलीला में दशहरे के दिन अहंकार और बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन होता और असत्य पर सत्य की जीत होती है।पूरा रामलीला ग्राउंड जय श्री राम के उदघोष से गूंज उठता है।रावण,मेघनाथ और कुम्भकर्ण के पुतले धु धु कर जल जाते है। हिंदू के इस त्योहार पर मुस्लिम भी भागेदारी निभाते है बल्कि एक परिवार तो तीन पीढ़ियों से यही कार्य करता आ रहा है। ग्रेटर नोएडा के ऐच्छर में श्री धार्मिक रामलीला कमेटी द्वारा रामलीला का आयोजन कराया जा रहा ।विजयदशमी यानी दशहरा के दिन रावण के पुतले को भी फूंका जाएगा।इस रावण व अन्य के पुतलों को एक मुस्लिम परिवार तैयार कर रहा है।बुलंदशहर के सिकंदराबाद के रहने वाले मोहमद हारून अपने दो बेटों के साथ इन पुतलों को तैयार कर रहे है।हारून ने बताया कि वो पिछले 15 दिनों से इन पुतलों को तैयार कर रहे है।

मोहम्मद हारून का पूरा परिवार यही कार्य करता है

मोहम्मद हारून का पूरा परिवार यही कार्य करता है और उनका ये पुश्तेनी कार्य है।उनके पिता भी रावण के पुतले तैयार करते थे और आज वो और उनका बेटा भी रावण के पुतले बना रहा है।उन्होंने बताया कि तीन पीढ़ियों से वो लोग रामलीला के लिए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले तैयार करते आ रहे है।पिछले 15 दिनों से करीब 10 से 15 कारीगरों के साथ हारून लग्न के साथ पुतलों को तैयार करने में जुटे हुए है।

रावण पर भी पड़ी कोरोना का मार,बजट की वजह से लम्बाई हुई कम

मोहम्मद हारून ने बताया कि कोरोना की मार उनकी कार्य पर भी देखने को मिल रही है। रामलीला में भी इसका असर दिख रहा है तो वही रावण व अन्य पुतले बनाने में भी कोरोना का असर जमकर दिख रहा है। पिछली बार कोरोना की वजह से रावण दहन नहीं हुआ था तो पुतले भी तैयार नहीं हुए और इस बार भी कोरोना की मार साफ दिख रही है, कोरोना की वजह से रावण सहित अन्य पुतलों की लंबाई कम की गई है। करीब 20 फुट तक इनकी लंबाई को घटा दिया गया है।इस बार कोरोना की वजह से रामलीला वालों का बजट कम है, साथ ही रामलीला करने के लिए भी कम समय मिला, उसकी वजह से इसका असर रावण,मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों पर पड़ा है। जहां इनकी लंबाई पहले करीब 60 से 70 फीट तक होती थी तो इस बार इसकी लंबाई 35 से 50 फीट तक ही है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि करीव आधी लंबाई को कोरोना की वजह से घटा दिया गया है।

दादा के बाद पोते भी बना रहे है रामलीला के लिए रावण व अन्य पुतले

मोहम्मद हारून के 21 वर्षीय बेटे हारिस ने बताया कि वो अपने दादा के समय से रावण के पुतले बनाने का काम करा रहे है।अब वो अपने पापा के साथ रावण के पुतले तैयार करने का काम करते है।आगे भी वो यही काम करते रहेंगे।इस बार कोरोना की मार रामलीला और दशहरा में दिख रही है।रामलीला में कोरोना गाइडलाइंस का रखा जाता है और सोशल डिस्टेन्स की वजह से कम लोगो को बुलाया जाता है।करीब 6 फिट की दूरी लोगो के बीच मे निर्धारित थी।कोरोना के चलते इस बार रामलीला के लिए देर से परमिशन मिली और समय कम मिला जिससे बजट भी कम हो गया।

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