राष्ट्रवाद और देश सुरक्षा अहम मुद्दा; मोदी राज में शिखर पर है भारत का सम्मान : डॉ. अनिल जैन

अंग्रेजी दैनिक ‘टॉप स्टोरी’ के संपादक प्रवीन आत्रे और वरिष्ठ संवाददाता अभिषेक ब्याहुत  के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन के संघर्षों को साझा किया। साथ ही मौजूदा लोकसभा चुनाव से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों के बाबत पूछे गए सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। उनहोने देश की सुरक्षा व राष्ट्रप्रेम और विकाश को अहम बताया I

नई दिल्ली: पेशे से चिकित्सक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अनिल कुमार जैन इंसान और समय, दोनों की नब्ज पहचानने में माहिर हैं। डॉ. जैन हरियाणा और छत्तीसगढ़ राज्यों के प्रभारी होने के साथ ही राज्यसभा सांसद भी हैं।उनहोने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा से प्रेरित होकर राजनीती में कदम रखा । किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ में दाखिला लेने से पहले वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बतौर कार्यकर्ता जुड़े हुए थे और १९७५ में देश में इमरजेंसी को नजदीक से अनुभव किया हैI उन्होंने उत्तरप्रदेश में आंदोलन कर 75 साल पुरानी पीजी मेडिकल एजुकेशन सिस्टम को बदलने का काम किया।

अंग्रेजी दैनिक ‘टॉप स्टोरी’ के संपादक प्रवीन आत्रे और वरिष्ठ संवाददाता अभिषेक ब्याहुत  के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन के संघर्षों को साझा किया। साथ ही मौजूदा लोकसभा चुनाव से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों के बाबत पूछे गए सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। उनहोने देश की सुरक्षा व राष्ट्रप्रेम और विकाश को अहम बताया I

प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश :

प्रश्न : कैसा लगाता है फिरोजाबाद से यहां तक की राजनीति का सफर?

उत्तर : मैंने मेडिकल की पढ़ाई की है। पेशे से सर्जन हूं। मेडिकल की पढ़ाई करने के पहले से ही संघ का प्रचारक बनने की इच्छा थी। तब  दोस्तों का मेडिकल में सलेक्शन हो गया और वे रह गए। तब उनके बड़े भाई और परिवार के दूसरे सदस्यों ने डांट लगाई। उसके बाद मैंने पढ़ाई की और मेरा भी सलेक्शन हो गया। पढ़ाई के दौरान बहुत संघर्ष किया। मैंने उप्र की 75 साल पुरानी पीजी मेडिकल एजुकेशन सिस्टम को बदलने का काम किया। यूपी पीपीजेडीए का अध्यक्ष था। तब एक बहुत बड़ा लगभग 22 लाख लोगों का आंदोलन शुरू हुआ लेकिन सफलता हाथ नहीं लगीI मेने रेजीडेंट डाक्टरों के 70 दिनो तक उत्तरप्रदेश में आंदोलन  चलाया लेकिन, मैंने अस्पताल बंद नहीं करने दिया। पैरलर ओपीडी चलाई, ताकि मरीजोें को दिक्कत न हो।

प्रश्न : संघ के साथ कितने समय से हैंबचपन में संघ से जुड़ने का ख्याल कैसे आया?

उत्तर : बचपन से संघ के साथ हूं I इमरजेंसी से पहले सत्याग्रह कर जेल जाने वाला था, लेकिन परीक्षा की वजह से साथियों ने मुझे रोक दिया था और वे खुद जेल चले गए। खेलकूद की बातें अच्छी नहीं लगी। देशभक्ति राष्ट्रवाद की बातों पर रोंगटे खड़े हो जाते थे। यह देशभक्ति का जज्बा था। अपने से बड़े उम्र के लोगों के साथ देश और समाज के बारे में जानने की कोशिश करता था। जिसने उन्हें संघ के साथ जुड़ने को प्रेरित किया। मैंने बीएससी आगरा यूनिवर्सिटी से और स्कूलिंग फिरोजाबाद से की।

प्रश्न : आप किनकिन मुद्दों पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं?

उत्तर : मुद्दा ये कि नरेंद्र मोदी नहीं तो कौन। एक तरफ सशक्त, परिश्रमी, दूरदर्शी, दुनिया का सबसे लोकप्रिय, दृढ़ इच्छाशक्ति वाला और साफ सुथरी छवि वाला नेता। दूसरी तरफ अराजकता। उधर कोई ऐसा नहीं, जो साफ छवि वाला है। कोई ईडी में है, कोई सीबीआई में और कोई बेल पर है। सबसे बड़ सवाल यही कि मोदी नहीं तो कौन। देश के लिए, देश की जनता के लिए यह सबसे बड़ा चुनाव है मुद्दा राष्ट्रवाद और देश की सुरक्षा का है। भारत की मान सम्मान स्वाभिमान जिस मुकाम पर है, वैसा कभी नहीं था। आज भारत के पासपोर्ट की इज्जत है। सुरक्षा के मामले में जीरो टालरेंस इसी सरकार ने अपनाई है। सेना का मनोबल इसी सरकार ने बढ़ाया है। देश में सेना का मनोबल रहेगा या गिरेगा, सेना के काम के सबूत मांगे जाएंगे या सेना के शौर्य की प्रशंसा की जाएगी। चाहते क्या हैं लोग। किस तरह का मैनिफेस्टो लेकर आए हैं। देश की सुरक्षा तुष्टिकरण की हद तक है। वोट बैंक की पॉलिटिक्स इस गिरावट तक आ गई है कि देश टूटे, देश का हिस्सा अलग हो, कश्मीर में अलगाववादी पनपें, माओवादी और नक्सली बढ़ें, इसकी चिंता नहीं है। बस वोट मिल जाए। ऐसी घिनौनी राजनीति करने वाली राजनीतिक पार्टियों को जनता जवाब देने वाली है।

प्रश्न : सांसद या विधायक को कोई नहीं जानता। लोग नमो या बीजेपी का झंडा देखकर ही लोग वोट करते हैं। सेकेंड लाइन तैयार नहीं है। एक तरफ मोदी दूसरी ओर पूरी भाजपा।  मोदी जी के बाद कौन?

उत्तर : अटल जी के समय भी ऐसा ही हुआ था। ऐसा नहीं कि दूसरी लाइन नहीं बन रही है। दरअसल जब कोई नेता होता है तो उसकी छाया में दूसरा दिखता नहीं है। इसलिए ये सवाल बेमानी है कि मोदी के बाद कौन है। मोदी जी की छत्रछाया में लोग सीख रहे हैं, लोग बढ़ रहे हैं। कैसे देश चलाया जाता है, कैसे चलाया जाना चाहिए, इसको लोग समझ रहे हैं।

प्रश्न : अटल जी के समय में कई नेता दिखाई देते थे। आज मोदी जी के सामने कोई नेता दिखाई नहीं देता है।

उत्तर : अभी मोदी जी की उम्र पर्याप्त शेष है। इसलिए ये सवाल बाद का है। भारतीय जनता पार्टी में लीडरशिप की कोई कमी नहीं है। किसी का नाम लेने की जरूरत नहीं है, लेकिन सच है कि लीडरशिप की कमी नहीं है। इसलिए इस समय यह सवाल अप्रासंगिक है।

 

प्रश्न : 2014 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा में बीजेपी ने 10 में 7 सीटें जीती थी। इस बार क्या होगा?

उत्तर : निश्चित तौर पर इस बार 10 की 10 सीटें बीजेपी जीतेगी। इसमें कोई शक नहीं है।

 

प्रश्न : हरियाणा में जाट आरक्षण मुद्दा बना थाआपको नहीं लगता कि जातिगत आधार पर वोटों के धु्रवीकरण से पार्टी को नुकसान होगा?

उत्तर : नहीं, हम सभी जातियों की बात करते हैं। ये कोई मेजर फैक्टर नहीं है। अब जाट आंदोलन का विषय समाप्त हो गया है। जबसे 10 प्रतिशत सवर्ण गरीबों के लिए आरक्षण आया है, तब से जाट आरक्षण का मुद्दा भी समाप्त हो गया है। अब कोई इस बात को उठाता ही नहीं। हम 3600 जातियों की राजनीति करते हैं। जो लोग एक जाति की राजनीति करते हैं, उनके लिए दिक्कत है। इसीलिए हम कहते हैं कि हम 10 की 10 सीटें जीतेंगे।

प्रश्न : हरियाणा में फिर सरकार आने की उम्मीद है फिरभी नेशनल हेराल्ड और राबर्ड बाड्रा पर सरकार खामोश क्यों है।

उत्तर : कोई खामोश नहीं है। हाईकोर्ट से दो बार बेल खारिज हो चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट से स्टे लिया गया है। सोनिया और राहुल बेल पर हैं उन्हें मुक्त नहीं किया गया है। समझ में नहीं आता कि किस मुंह से ये लोग एक साफ सुथरी छवि के व्यक्ति पर ऊंगली उठाते हैं। जहां तक राबर्ट वाड्रा का सवाल है। कानूनी प्रक्रिया है। कानून अपना काम कर रहा है। हम न किसी को फंसा रहे हैं, न बचा रहे हैं।

प्रश्न : हरियाणा में स्टेट लीडरशिप से अधिक ब्यूरोक्रेसी को तवज्जो दी जा रही है। वहां ब्यूरोक्रेस हॉबी है?

उत्तर : मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा में साफ-सुथरी सरकार दिया है। वहां न माफियागिरी है, न कब्जागिरी। वहां जमीन से जुड़ी और सबसे अधिक पारदर्शी सरकार है।

प्रश्न : बीते लोकसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा ने आपका समर्थन किया था। बाद में राम रहीम पर कार्रवाई हुई। आपको उससे नुकसान होगा या फायदा।

उत्तर : हर काम वोट के नजरिये से नहीं किया जाता है। किसी काम से फायदा होगा या नुकसान, ये चीजें वोट के तराजू में नहीं तौलना चाहिए।जो देश का वोटर है, जो नागरिक है, हम सबसे वोट मांगते हैं। हर चीज वोट के नजरिये से देखेंगे तो देश और प्रदेश नहीं चल सकता है। कानूनी व्यवस्था है। वह अदालत ने किया है। भारतीय जनता पार्टी ने नहीं किया है। न्यायालय के आदेश की अवमानना न हो, इसकी कोशिश वहां की सरकार ने की है। इसके लिए सरकार को बधाई देनी चाहिए। इसको वोट के चश्मे से देखकर इस पर सवाल नहीं खड़े किए जाने चाहिए।

प्रश्न : कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का आप पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर : कोई असर नहीं पड़ेगा। इस यात्रा का कोई मतलब नहीं है। कौन सा परिवर्तन। किसका परिवर्तन।

प्रश्न : हरियाणा में ढेर सारे खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरास्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके लिए बीजेपी का क्या प्लान है?

उत्तर : भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पूरे हरियाणा में जगह-जगह स्टेडियम बनाए गए हैं। खिलाड़ियों को मान-सम्मान दिया गया। मेडल लेकर आने वाले खिलाड़ियों को भी सिर आंखों पर बिठाया गया। खिलाड़ियों के लिए हरियाणा सबसे महफूज स्थान है।

प्रश्न : लोकसभा चुनाव में एनडीए को कितनी सीटें आएंगी?

उत्तर : सिर्फ ये कह सकता हूं कि पिछली बार से अधिक सीटें आएंगी। पिछली बार अकेले भाजपा को 282 सीटें मिली थीं।इस बार यह आंकड़ा 300 पार होगा। एनडीए को मिलाकर यह संख्या और अधिक हो जाएंगी।

सह संपादन
सुबोध कुमार 
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