Navratri 2nd Day: नवरात्रि के दूसरे दिन होती है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें पूजा- विधि

माता ब्रह्मचारिणी को तप की देवी माना जाता है

Navratri 2nd Day: 7 अक्टूबर से शुरू हुए शारदीय नवरात्रि का आज दूसरा दिन है. मां के द्वितीय स्वरूप यानी मां ब्रह्मचारिणी की नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा- अर्चना की जाती है. व्यक्ति को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से अपने कार्य में सदैव विजय प्राप्त होता है. मां ब्रह्मचारिणी दुष्टों को सन्मार्ग दिखाने वाली हैं. माता की भक्ति से तप की शक्ति,सदाचार, त्याग, संयम और वैराग्य जैसे गुणों में वृद्धि होती है.

माता ब्रह्मचारिणी को तप की देवी माना जाता है. माता का नाम ब्रह्मचारिणी हजारों वर्षों तक कठिन तपस्य करने के बाद पड़ा था. उन्होंने तपस्या की इस अवधि में कई सालों तक निराहार व्रत किया था, देवों के देव महादेव जिससे काफी प्रसन्न हुए थे. प्रसन्न होकर शिवजी ने माता पार्वती को अपनी पत्नी रूप में स्वीकार किया था.

पूजा- विधि

  • इस दिन सुबह उठकर जल्दी स्नान कर लें, फिर पूजास्थल पर गंगाजल डालकर उसको शुद्धि कर लें.
  • मंदिर में दीप प्रज्वलित करें.
  • गंगा जल से मां दुर्गा का अभिषेक करें.
  • मां दुर्गा को अब अर्घ्य दें.
  • मां के चरणों में अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, फल और मिठाई प्रसाद के रूप में चढ़ाएं.
  • धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और इसके बाद मां की आरती करें.
  • इसके बाद मां को भोग लगाएं. भोग लगाते समय ये ध्यान रखें कि मां को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है.

ये भोग हैमां ब्रह्मचारिणी को पसंद-

गुड़हल और कमल का फूल देवी मां ब्रह्मचारिणी को बेहद पसंद है और इसलिए इन्हीं फूलों को मां की पूजा के दौरान उनके चरणों में अर्पित करें. चूंकि चीनी और मिश्री मां को काफी पसंद है इसलिए चीनी, मिश्री और पंचामृत का मां को भोग लगाएं. दूध और दूध से बने व्‍यंजन मां ब्रह्मचारिणी को अति प्रिय होते हैं. इसलिए उन्‍हें आप दूध से बने व्‍यंजनों का भोग लगा सकते हैं. देवी ब्रह्मचारिणी इस भोग से प्रसन्न हो जाएंगी. इन्हीं चीजों का दान करने से लंबी आयु का सौभाग्य भी पाया जा सकता है.

मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र:

या देवी सर्वभू‍तेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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