नवरात्रि में देवी दुर्गा का आगमन होगा पालकी में, स्त्रियों का बढ़ेगा वर्चस्व

-इन नवरात्रि में स्त्री शक्ति को मिलेंगे विशेष ऊर्जा व बल, राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगा वर्चस्व

[]◆नवरात्रि पर्व विशेष◆[]

 

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

आप सभी हिंदु सनातन धर्म प्रेमियों को सादर प्रणाम, आपको अवगत कराना चाहता हूं कि 07 अक्टूबर 2021 से नवरात्रि पर्व प्रारंभ हो रहा है।

सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। जगत के कल्याण के लिए आदि शक्ति ने अपने तेज को नौ अलग- अलग रूपों में प्रकट किया, जिन्हें हम नव-दुर्गा कहते हैं।

नवरात्रि का समय माता दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। देवी मां का आगमन पालकी (डोली) में होगा क्योंकि, धार्मिक मान्यतानुसार गुरूवार और शुक्रवार को यदि नवरात्र प्रारंभ हो तो माता की सवारी डोली होती है। इसलिए इस बार नवरात्रि में देवी माता रानी पालकी में सवार होकर आ रही है, जो अति शुभ रहने वाला है।

मर्यादा अनुसार ऐसा माना जाता है नवरात्रि में पालकी पर देवी दुर्गा का आगमन स्त्री शक्ति को विशेष ऊर्जावान व बलवान बनाता है, परन्तु इसे प्राकृतिक और राजनैतिक उथल- पुथल का संकेत भी माना जाता है।इसलिए अगले कुछ समय में स्त्रियों का वर्चस्व राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगा परन्तु राजनैतिक उथल-पुथल की स्थिति देखने को मिल सकती है।

नवरात्रि तिथि व नौ देवियां शारदीय नवरात्रि में चतुर्थी तिथि क्षय होने के कारण नवरात्रि का एक दिन घट रहा है। इसलिए इस बार नवरात्रि का पर्व आठ दिन ही रहेगा।

◆7 अक्टूबर 2021 प्रथम नवरात्र मां शैलपुत्री ।
◆8 अक्टूबर 2021 द्वितीय नवरात्र मां ब्रह्मचारिणी ।
◆9 अक्टूबर 2021 तृतीय व चतुर्थ नवरात्र मां चंद्रघंटा व मां कुष्मांडा।
◆10 अक्टूबर 2021 पंचम नवरात्र मां स्कंदमाता।
◆11 अक्टूबर 2021 षष्ठी नवरात्र मां कात्यायनी ।
◆12 अक्टूबर 2021 सप्तम नवरात्र मां कालरात्रि।
◆13 अक्टूबर 2021 दुर्गा अष्टमी मां महागौरी को समर्पित।
◆14 अक्टूबर 2021 नवमी तिथि मां सिद्धिदात्री ।
◆15 अक्टूबर 2021: दशहरा ( विजय दशमी)

घट स्थापना शुभ मुहूर्त

कलश स्थापना के लिए पवित्र शुभ मुहूर्त सुबह 06:17 से प्रारम्भ होकर सुबह 07:07 तक रहेगा।
कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:32 तक है, घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है।
घटस्थापना मुहूर्त निषिद्ध समय चित्रा नक्षत्र के दौरान होगा।

कलश स्थापना विधि

नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नानादि करके पूरे घर व पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कीजिए, तत्पश्चात लकड़ी की चौकी पर लाल आसन बिछाएं, और आसन के उपर थोड़े साफ चावल छिड़के तथा एक मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं, साथ ही उस पात्र के साथ शुद्ध जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।

कलश पर स्वास्तिक बनाएं, कलश में साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालकर आम के पत्तो की टेहनी रखें, या 07 पान रखे, तथा नारियल लें और उस पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांध लें।
इस नारियल को कलश के ऊपर रखते हुए अब मां दुर्गा का ध्यान व आव्हान करें।

प्रतिदिन पूर्ण श्रद्धा पूर्वक माता के नौ रूपों की उपासना करें, गौ घी का दीपक जलाएं, फलाहार का भोग अर्पित करें, माता रानी हम और आप सभी की मनोकानाएं सदा पूर्ण करें।

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।

जय माता दी।

■आचार्य डा. संजीव अग्रवाल मेरठरत्न मेरठ, (वास्तु व ज्योतिष सलाहकार)

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