पक्षी बदल सकते हैं भाग्य, जानिए शुभ-अशुभ विचार

पक्षी और उनके पंख भगवान से जुड़े माने जाते है, पंखों को ईश्वर का संदेश माना जाता है। साथ ही मानसिक शांति व प्रेरणा का प्रतीक भी माना जाता है

आचार्य डॉ. संजीव अग्रवाल, मेरठ रत्न, मेरठ

पक्षी बदले आपका भाग्य?
मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है, व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है, बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रश्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है।

भारत मे पंच पक्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है, भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताओ के वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का वर्णन है।

जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्ष्मी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा सरस्वती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ, आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था।

मित्रों, पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रशंसा, यश, धन्यवाद देने, प्रजनन शक्ति, मानसिक शांति व आत्मा की यात्रा और प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है।
पक्षी और उनके पंख भगवान से जुड़े माने जाते है, पंखों को ईश्वर का संदेश माना जाता है।

एक घटना 2005 में सिटी स्टेशन, लखनऊ के निकट एक कबाड़ी के पास तिब्बती युनानी हकीमी पद्धति की फटी सटी मोटी किताब देखी गयी जिसमे सारे रोगों का ईलाज विभिन्न पक्षियों के मांस द्वारा किये जाने का वर्णन था।

भारत मे 19 वीं सदी के ठगी उन्मूलन के मशहूर नायक कर्नल हेनरी विलियम स्लीमैन को ठगों में बताया था कि वे ठगी अभियान से पूर्व पशु पक्षियों का शकुन विचारते थे उनके अनेक दल अशुभ पक्षी अपशकुनों के कारण पकड़े गये पक्षियों द्वारा भविष्यवाणी करने की हजारों घटनायें इतिहास मे वर्णित है।

संसार मे पक्षियों के बारे मे प्रचलित महत्वपूर्ण शकुन व ज्योतिष मान्यताओं तथा उनके द्वारा मानव जीवन की विभिन्न समस्याओं के उपचारों का वर्णन किया गया है।

यदि चिड़िया आपके घर मे या घर के निकट घोंसला बनाये तो यह सौभाग्य का चिन्ह है। भविष्य मे कोई शुभ समाचार या उन्नति का अवसर प्राप्त होगा।

चिड़िया शक्तिशाली संरक्षक तथा सुरक्षा करने वाली मानी जाती है। कौओं को ईश्वर का सन्देश वाहक माना जाता है।

कोई चिड़िया सर पर बैठे तो अचानक धन की प्राप्ति होगी।

घर मे चमगादडों का आना रोग़ या घर के निकट मंड़राना मृत्यु सूचक है भवन मे चमगादड़ो का वास मृत्यु तुल्य कष्ट देगा परन्तु चीनी इन्हें शुभ और भारी धन दायक मानते है।

घर के निकट किसी चिड़िया का व्यवहार ही घर मे घटने वाली घटनाओं को निर्धारित करता है।

घर पर या उसके निकट उल्लुओं का आना या बोलना महा अशुभ माना जाता है।

कौऐ या काली चिड़िया शुभ यात्रा, शुभ घटना और सुरक्षा देती है। बाज आंखो के रोग नाश करता हैं चहकने वाली चिड़िया कठिन लक्ष्य की पूर्ति कराती है।

पंख मिलना

यदि आपको सड़क या किसी लांन, बाग, खेत, गार्डन मे कोई पंख मिल जाता है, उसे तुरंत उठाकर रख लें क्योंकि यह निम्न बातें बताता है।

कोई प्रिय यक्ति या कोई चीज हमसे मिलना चाहता है। कोई आपका प्रियजन जो गुजर गया हो कोई खोई वस्तु या बिछड़ा व्यक्ति अचानक मिल सकता है यह चेतावनी देते है। कि आपको आत्ममंथन व आत्मविश्लेषण की आवश्यकता है। कुछ कमियों कारण आप असफल हो रहे है। आपको आराम, तनाव मुक्ति, आनंद तथा गंभीरता त्यागने की आवश्यकता है। आप अपने जीवन मे घट रही शुभ घटनाओं तथा दुनिया की सहायता के लिये संसार का आभार माने तथा व्यक्त करें।

पक्षियों के मृत्यु दायक शकुन

घर पर उल्लू कर बोलना मृत्यु सूचक है। शाम को घर के बाहर पेड़ पर उल्लू बोले तो साल भर मे मित्र या संबधी की मृत्यु होगी घर के पास उल्लू बोले तो पड़ोस मे मृत्यु होगी।

रात मे किसी सफेद पक्षी, कौऐ का खिड़की से टकराना किसी परिजन की मृत्यु का सूचक है। किसी कबूतर का खिड़की से टकराना किसी परिजन की मृत्यु का सूचक है।

एक साथ छह कौए का दिखना भी मृत्यु सूचक है।

घर मे चमगादड़ का मंड़राना आने वाले किसी के मौत की भविष्यवाणी है। तुरंत घर छोड़ दें या तुरंत चमगादड़ कों उसके उड़ने से पूर्व मार दें सब कुछ ठक हो जायेगा।

रोगी के कक्ष मे चिड़िया का आना तथा बिस्तर के पास बैठना मृत्यु सूचक है।

दो जंगली कबूतरों का पेड़ पर दिखना मृत्यु सूचक है।

यदि कठफोड़वा दरवाजे को खटखटाये तो घर मे मृत्यु आये।

पंखो द्वारा उपचार
मोरपंख अकाल मृत्यु का नाश करता है। यदि अचानक पड़ा मिला जाये तो अति शुभ है।

काले पंख का का मिलना सुरक्षा, चेतावनी, उन्नति, बौद्धिक विकास, अध्यात्मिक शुरूआत, शुभ शक्ति की चेतावनी है। एक देवदूत आपकी शक्ति को सुरक्षित कर रहा है।

हरा पंख सफलता, धन, रोगमुक्ति, समृद्धि, भौगोलिक, वानस्पतिक भावना देता है। पीला आनंद, प्रसन्नता, मानसिक स्फूर्ति व सावधानी, बुद्धिमता देता है। बधाई हो आप सही मार्ग पर है।

नीला- शांति प्रेरणा, मनोवैज्ञाानिक जागृति, आत्मिकसंबध लाल सौभाग्य, भावना, साहस धन सुरक्षा प्रेम, मानसिक शक्तियां सुप्त है। मन की आवाज के अनुसार कार्य करें।

सफेद- संरक्षा, आशा, शुद्धता, विश्वास, देवदत या पवित्र आत्मा, संतात्मा, पास है। अध्यात्मिकता देता है।

सिलेटी- शांति व उदासीनता, तटस्थता, जीवन झूठ, छल कपट पाखंडता से भरा है। शांति आ रही है।

गुलाबी- निःस्वार्थ शर्तहीन प्रेम, प्रेरणा, आदर, वफादारी, संतुलित व्यवहार तालमेल, देखभाल करने वाला दया, प्रेम या वात्सल्य प्रेम नांरगी उर्जा परिवर्तन आशावाद सफलता नये विचार रचनात्मकता, शारीरिक प्रेम सेक्स।

बैंगनी- विश्वव्यापी चेतना, उच्चतर अध्यात्मिक विकास आत्मिक संबधी भूरा सम्मान, स्थिरता, मित्रत्रता, घर, स्थाई निवास, प्रारंभिक षिक्षा धैर्यता, सहनशीलता, निरन्तरता, सहनशक्ति।

मित्रों! भारतीय तंत्र शास्त्र मे पक्षियों का विशेष महत्व दिया गया है। कौआ उनमे बहुत खास माना गया है। पुराने ज्ञानियों ने कौअे के संकेतों को समझ कर अनेक शकुन अपशकुन तय किये थे भारतीय शास्त्रों मे पितरों की शांति हेतु तीन जीवों को विशेष महत्व दिया गया है।

गाय, कुत्ता व कौआ श्राद्ध मे इनको ग्रास दिये बिना ही पितरों का तृप्ति को नही मिलती है और श्राद्ध का फल भी नही मिलता है।

शनि शांति का अमोघ विधान

तंत्रशास्त्र में शनि शांति का एक अनोखा विधान बताया है। कौअे को बलि देने वाला सात जन्मों के भयंकर पापों से छुटकारा मिल जाता है।
काक बलि का विधान अति सरल पर प्रभावशाली है, रात मे एक लोहे के बर्तन मे कौअे के खाने के लिये कुछ वस्तुयें रख कर सबेरे उठ कर सबसे पहले यह भोजन कौअे को खिला देना चाहिये। इसमें पूरी, पराठा, रोटी, चावल कुछ भी होना चाहिये। यह विधान अमावस्या से शुरू करके बारह मास करते रहें।

यह उपाय रोग, संकट, दुर्भाग्य, निर्धनता से मुक्ति देता है, घर मे धन धान्य की कमी नही रहती है, इस उपाय से साढे साती शनि व शनि की ढईया के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

रोग मुक्ति का उपाय-कौआ जिस स्थान का जल पीता है, उसका बचा पानी लाकर रोगी पर छिड़क देने से रोगी रोग मुक्त हो जाता है।

यात्रा करते समय नीलकंठ दिखना बहुत शुभ माना जाता है।

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