अकेला ही रहेगा कस्तूरी हिरन, पर्यावरण मंत्रालय ने खारिज की अपील

पर्यावरणविद रंजन तोमर ने पत्र लिखकर की थी अपील

नोएडा। देशभर के चिड़ियाघरों में सिर्फ एक ही कस्तूरी हिरन बचा है। हाल ही में आरटीआई के जवाब में यह जानकारी मिली है। इसके बाद समाजसेवी व पर्यावरणविद् रंजन तोमर ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की थी कि इस अकेले हिरन को बचाने का प्रयास किया जाए। इसके लिए इसे दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाए या बाहर से मादा हिरन यहां लाई जाए। लेकिन, इस मांग को खारिज करते हुए पर्यावरण मंत्रालय ने हाथ खड़े कर दिए हैं।

रंजन तोमर के पत्र के जवाब में मंत्रालय का कहना है कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को दी गई शिकायत के संबंध में यह सूचित करना है कि हिमालयन नेचर पार्क कुफरी, हिमांचल प्रदेश में केवल एक मस्क हिरण को रखा गया है। मान्यता प्राप्त चिड़ियाघरों में इन प्रजातियों के कोई अन्य जानवर नहीं हैं। इसके अलावा वाइल्ड लाइफ (प्रोटेक्शन) अधिनियम-1972 की धारा-38 क (2) के प्रावधानों के अनुसार कोई चिड़ियाघर किसी भी जंगली या बंदी जानवर को अधिग्रहित या बेच नहीं सकता है, सिवाय मान्यता प्राप्त चिड़ियाघर के। इस आधार पर जानवर को स्थानांतरित करने का सवाल पैदा नहीं होता है।

यह पत्र रंजन तोमर ने राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के पूर्व निदेशक बीएम अरोरा के साथ लिखा था। गौरतलब है कि बीएस अरोरा देश के प्रख्यात पशु चिकित्सक हैं और पशुओं पर कई किताबें लिख चुके हैं। बीएम अरोरा का कहना है कि अल्मोड़ा में मस्क हिरन का भारत सरकार से मान्यता प्राप्त एक बंदी केंद्र भी है, जहां उनसे मस्क नामक पदार्थ निकाला जाता है। लेकिन, यह जानकारी नहीं है कि उसमें कितने मस्क हिरन बचे हैं। साथ ही कितनी मादा और नर हैं। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के प्रस्तावना के अनुभाग 1.3 में ही संरक्षण को चिड़ियाघर का मुख्य उद्देश्य बताया गया है। फिर यहां इस प्रकार के प्रयास करने में प्राधिकरण क्यों ऐसे नियमों का हवाला दे रहा है।

रंजन तोमर ने कहा कि सरकार को इस बाबत अतिशीघ्र कदम उठाने चाहिए, जिससे इस प्रजाति को विलुप्त होने से बचाया जा सके। उन्होंने सुझाव दिया है कि बंदी केंद्र या विदेश से मादा हिरन को लाया जाए और किसी तरह इनका समागम करवाया जाए। जब वह नर हिरन-2018 के पहले से वहां रह रहा है तो अब तक ऐसे कदम न उठाया जाना विचित्र और हैरान करने वाला है।

रंजन तोमर ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय का यह जवाब चिंताजनक है। इस प्रकार यदि प्राणी विलुप्त होते रहे तो हमारी भावी पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। उन्होंने एक पत्र प्रधानमंत्री के नाम भी लिखा है और उम्मीद जताई है कि वह इस पर कार्रवाई जरूर करेंगे। इसके साथ ही श्री तोमर ने राष्ट्रीय हरित न्यायालय जाने का रास्ता भी खुला रखा है।

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