अब ‘चाय पर’ नहीं ‘नाव पर चर्चा’

प्रियंका को विरासत में मिली है सियासत, पाठशाला की जरूरत नहीं

-सुबोध कुमार-

प्रयागराज। वर्ष-2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपने प्रधानमंत्री पद के चेहरे नरेंद्र मोदी को चाय वाला करार दिया और पूरे देश में ‘चाय पर चर्चा’ नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। अब उस बात को लगभग पांच वर्ष बीतने को हैं। अब चाय वाला तो गुम हो गया। लेकिन, अब कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने चाय पर चर्चा की जगह ‘नाव पर चर्चा’ करने का फैसला किया है।

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी को भी लगने लगा है कि नरेंद्र मोदी ने अपने को जिस गंगा मां का बेटा कहकर सत्ता पर काबिज हुए। उसी गंगा मां की गोद में बैठकर वह भी चुनावी वैतरणी पार कर लेंगी। प्रयागराज से काशी तक की गंगा यात्रा के दौरान प्रियंका गांधी कई जगहों पर रुकेंगी और लोगों से संवाद करेंगी। उन्हें भी यह लगने लगा है कि चुनावी दरिया पार करने के लिए हिन्दुत्व की जरूरत पड़ेगी। इसीलिए वह प्रयागराज में भगवान हनुमान के दर्शन के बाद मां गंगा की पूजा अर्चना की। उसके बाद क्रूज बोट से उनकी काशी तक की तीन दिनी यात्रा की शुरुआत हुई।

रास्ते में वह लोगों के साथ ‘नाव पर चर्चा’ के वह सभाओं को भी संबोधित कर रही हैं। एक सभा में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेताओं पर तंज किया, अब ‘चाय वाला’ अब चौकीदार हो गया। लेकिन, उन्हें यह नहीं पता कि चौकीदार रखने की हैसियत गरीबों में नहीं होती है। उन्होंने कहा कि यह समय घर में बैठने का नहीं है। उन्होंने अपने बारे में भी कहा, मैं भी घर में बैठी थी, लेकिन मजबूरन दहलीज से बाहर निकलना पड़ा। प्रियंका गांधी के सिरसा में हुए एक किलोमीटर दूरी तक के रोड शो में जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान उन्होंने हर चौखट पर दस्तक दस्तक दी।

प्रियंका गांधी ने कहा कि देश के लोगों को बेमतलब के मुद्दों में उलझया जा रहा है। देश की जनता के हितों पर राजनीति नामुनासिब है। नौजवान और किसान परेशान हैं। लेकिन, भाजपा का ध्यान इस ओर नहीं है। उन्होंने सभा में आए लोगों से ही पूछा, आपके पास रोजगार है? उन्होंने कहा कि बीते 45 साल में यह समय ऐसा है, जब देश में सर्वाधिक बेरोजगारी है। मनरेगा में काम करने वालों को भी छह माह से पैसा नहीं मिला है। किसानों को फसल का उचित दाम, युवाओं को रोजगार और महिलाओं को सुरक्षा चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं, देश की हकीकत है। लेकिन, इस ओर से लोगों को भटकाया जा रहा है।

कांग्रेस के धुर विरोधी राहुल को पप्पू और प्रियंका को नौसिखिया करार दे रहे हैं, लेकिन मौजूदा दौरे में प्रियंका गांधी ने यह साफ संदेश देने की कोशिश की है कि उन्हें सियासत विरासत में मिली है। इसके लिए उन्हें किसी पाठशाला की जरूरत नहीं है। वह सियासी हैं और सियासत की भाषा भी जानती हैं।

Leave A Reply