2210 रुपये की किताबें चार गुनी कीमत 9500 में!

सरकार और शिक्षा विभाग की आंखें बंद होने से निजी स्कूलों ने मचाई लूट

देहरादून। सबको शिक्षा का अधिकार, एक राष्ट्र-एक समान पाठ्यक्रम के दावों और पिछले वर्ष के शिक्षा मंत्री के आदेशों की निजी स्कूल के मालिकों, प्रबंधकों और बुक सेलर्स के गठबंधन ने धज्जियां उठानी शुरू कर दी है।

अभिभावकों की अगर मानें तो बच्चों की पढ़ाई और उनके स्कूलों के नए सत्र प्रारम्भ होते ही सरकार के निदेशों को स्कूलों ने दरकिनार कर दिया। शासन और शिक्षा विभाग की उदासीनता का ही नतीजा है कि निजी स्कूल संचालक और बुकसेलर्स के गठबंधन ने अभिभावकों के साथ लूट-खसोट शुरू कर दी है। अभिभावकों का आरोप है कि कक्षा 3 से लेकर कक्षा 8 तक की किताबों और कापियों की जो लिस्ट पकड़ाई जा रही है, उसके साथ ही किताबें मिलने के स्थान और बुकसेलर्स के बारे में भी बताया जा रहा है। यानि सब कुछ पहले से ही फिक्स है।

आरोप है कि जो किताबें 2210 रुपये में मिलनी चाहिए, वह चार गुने अधिक मूल्य यानि 9500 रुपये में खरीदनी पड़ रही है। यही नहीं, पाठ्यक्रम के अनुसार आवश्यक किताब कापियों के अतिरिक्त अनावश्यक रूप से भारी भरकम लिस्ट की किताबें खरीदनी पड़ रही है। इससे अभिभावकों में रोष व्याप्त है। अभिभावकों ने सरकार, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से इस बात की शिकायत की है और इस लूट को बंद कराने और गलत काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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