तकनीकी विकास में सबसे अनुकूल हैं संस्कृत व अन्य भारतीय भाषाएं : गिरीश नाथ

-प्रो. झा ने विभिन्न तर्कों के माध्यम से समझाया कि कंप्यूटर की कोडिंग के लिए संस्कृत भाषा कैसे अपनी अलग पहचान रखती है

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध मैत्रेयी कॉलेज एवं अमेरिका स्थित इन्स्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड साइंसेज के संयुक्त तत्वावधान में डिजिटल टूल्स एवं भारतीय भाषाओं पर आधारित त्रैमासिक प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम के दूसरे दिन जेएनयू के प्रो. गिरीश नाथ झा ने व्याख्यान दिया। जो उनके अध्ययन ज्ञान का प्रतिबिंब था।

प्रो. झा ने विभिन्न तर्कों के माध्यम से समझाया कि कंप्यूटर की कोडिंग के लिए संस्कृत भाषा किस प्रकार अपनी अलग पहचान रखती है। पाणिनि के द्वारा प्रतिपादित नियम आज भी बेहद सटीक सिद्ध होते हैं। उन्होंने पाणिनि और चॉम्स्की की भाषा वैज्ञानिक दृष्टि पर भी प्रकाश डाला। साथ ही यह भी बताया कि संस्कृत भाषा से जुड़े विद्यार्थी और शोधार्थी किस प्रकार तकनीकी से अपने को जोड़कर सफलता की ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

उन्होंने भारतीय भाषाओं को डिजिटल बनाने के लिए विभिन्न तकनीकी संसाधनों की चर्चा भी की। गौरतलब है कि प्रो. झा ने डिजिटल टूल्स एवं संस्कृत को लेकर अनेक गुणवत्तापूर्ण शोध किए हैं। आज हम संस्कृत, हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के गूगल पर जो भी टूल्स देखते हैं, उसके निर्माण में प्रो. झा की महती भूमिका रही है। यहाँ यह भी बताते चलें कि कार्यक्रम शुरू होते ही कोर्स कॉर्डिनेटर डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने प्रतिभागियों को कोर्स से जुड़े विभिन्न नियमों को समझाया। संयोजिका डॉ. ज्योति सिंह ने मुख्यवक्ता एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया।

व्याख्यान के अंत में डॉ. स्मृति सिंह ने बहुत सारगर्भित टिप्प्णी करते हुए इस व्याख्यान को अतीव ज्ञानवर्धक बताया, जबकि अमेरिका से कोर्स क्वार्डिनेटर डॉ. उमेश कुमार सिंह ने प्रो. झा के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए सभी प्रतिभागियों को कोर्स को मनोयोग से करने के लिए प्रेरित किया।

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