तीन लाख लोगों ने ली कोरोना की दूसरी खुराक

सरकारी और निजी केंद्रों में पहली खुराक के मुकाबले दूसरी खुराक ज्यादा दी गई है।

नोएडा: जिले को कोरोना मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें काफी मेहनत से काम कर रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले करीब एक महीने में सवा लाख तीन लोगों कोरोनारोधी टीके की दूसरी खुराक लगा दी गई है।वहीं अब तक करीब आठ लाख लोगों को दूसरी खुराक दी जा चुकी है। एक महीने से सरकारी और निजी केंद्रों में पहली खुराक के मुकाबले दूसरी खुराक ज्यादा दी गई है।
चार सितम्बर से एक अक्तूबर तक जिले में चार लाख 86 हजार 916 लोगों को टीका दिया गया। इसमें से तीन लाख 23 हजार 827 ने दूसरी खुराक ली। वहीं£, पहली खुराक लेने वाले लोगों की संख्या एक लाख 63 हजार 89 रही। इस महीने दूसरी खुराक लेने वाले लोगों का प्रतिशत 66.50 रहा। अब तक जिले के सरकारी और निजी टीकाकरण केंद्रों पर सात लाख 98 हजार लोगों को टीका लगाया जा चुका है।
निजी और सरकारी केंद्रों पर टीके लेने वालों की भीड़ बढ़ी
अप्रैल के बाद से पहली और दूसरी खुराक के बीच का अंतर 84 दिनों तक कर दिया गया था। इससे पहले एक महीने के अंतराल में दूसरी खुराक दी जा रही थी। अगस्त तक पहली खुराक लेने वाले लोगों की संख्या दूसरी खुराक लेने वालों से अधिक थी। दूसरी खुराक लेने वाले लोगों की कम संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे लोगों के लिए शनिवार का दिन रिर्जव कर दिया। साथ ही, बिना स्लॉट भी कई केंद्रों पर टीके दिए गए। निजी केंद्रों के साथ ही सरकारी केंद्रों पर भी दूसरी खुराक लेने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ी है। जिले में पहली खुराक 17 लाख 7 हजार से अधिक लोगों ने ली है जो लक्ष्य से सवा लाख अधिक है।
18-45 आयुवर्ग के 17.24 लाख ने टीका लिया
युवाओं ने सबसे अधिक (18-45 आयुवर्ग) 17,24,240 टीके लगवाए, जबकि 60 से अधिक आयुवर्ग के दो लाख 68 हजार को टीका दिया गया। 45 से 60 आयुवर्ग के बीच पांच लाख 6 हजार को पहली और दूसरी खुराक लगाई गई। इस आयुवर्ग में अब भी 20 हजार से अधिक लोगों को दूसरी खुराक दी जानी है। घर-घर हुए सर्वे में इस बारे में जानकारी जुटाई गई थी।
कुल टीकाकरण :24, 99, 303
पहली खुराक : 17, 07, 572
दूसरी खुराक : 7, 91, 731
टीकाकरण अधिकारी डॉ नीरज त्यागी ने बताया कि पहली खुराक शत प्रतिशत से अधिक होने के बाद भी लोग टीका लेने आ रहे हैं। एक महीने पहले तक दूसरी खुराक लेने वाले लोगों की संख्या थोड़ी कम थी। लिहाजा ऐसे लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित किया गया। ज्यादातर दूसरी खुराक लेने वाले लोग ही बचे हैं।

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