जिला जेल से छोड़े गए 15 और बंदी, अब तक 445 की रिहाई : विपिन मिश्र

उन्हीं बंदियों की रिहाई, जिनके गुनाह की सजा अधिकतम सात साल

ग्रेटर नोएडा। दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस (कोविड-19) के मद्देनजर सुप्रीम अदालत के सुझाव पर अमल करते हुए रविवार को लुक्सर जिला कारागार से 15 विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया। रिहा किए गए कैदियों में सिर्फ वही शामिल थे, जिनके गुनाह की अधिकतक सजा सात वर्ष हो सकती है। कोरोना संकट के कारण अब तक कुल 445 बंदियों की रिहाई हो चुकी है।

जेल अधीक्षक विपिन कुमार मिश्र ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर उत्तर प्रदेश शासन की ओर गठित हाईपावर कमेटी ने कोरोना के मद्देनजर प्रदेश की जेलों में बंद उन कैदियों को रिहा करने की सिफारिश की थी, जिनके गुनाह की अधिकतक सजा सात वर्ष हो सकती है। इस बाबत 28 मार्च को जिला जज ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर बंदियों की रिहाई का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद अपर सत्र न्यायाधीश इंद्रप्रीत सिंह जोश, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शमीम अहमद अंसारी और सिविल जज विकास कुमार वर्मा ने कुल 17 ऐसे मामलों पर विचार किया, जिनमें अभियुक्तों को अधिकतम सात वर्ष तक की सजा हो सकती है। सुनवाई के बाद 15 विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से धर्मेंद्र कुमार जैन्त, जेल अधीक्षक विपिन कुमार मिश्र और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मौजूद रहे।

उन्होंने बताया कि रविवार को हुई रिहाई के बाद गौतमबुद्ध नगर की लुक्सर जेल से अब तक कोरोना संकट के कारण 445 बंदियों को अंतरिम जमानत या पैरोल पर रिहा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि 04 अप्रैल को भी कुल 84 लोगों को रिहा किया गया था। उनमें 42 पुरुष और 42 महिलाएं शामिल थीं।

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