यूपीसीएल के एमडी की मर्जी पर होती है कार्रवाई

ऊर्जा सचिव के आदेश पर मजबूरी में एसई समेत तीन पर गिरी गाज

देहरादून। प्रदेश की ऊर्जा सचिव राधिका झा के आदेश पर गदरपुर यशोदा राइस मिल बिजली चोरी मामले में कार्रवाई की गई है। इसके तहत अधीक्षण अभियंता नरेंद्र सिंह टोलिया, एक्सईएन उमाकांत चतुर्वेदी और एसडीओ गिरीश चंद आर्य को सस्पेंड कर दिया गया। राघिका झा ने यह भी आदेश दिया कि यूपीसीएल में लंबित सभी जांच अगले 15 दिन में पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी साफ किया कि बिजली चोरी में बड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

गौरतलब है कि इससे पूर्व लक्सर, भगवानपुर और काशीपुर में बिजली चोरी के मामलों में ऊर्जा सचिव के निर्देश के बावजूद पकड़ी गई डिवाइस प्रकरण में यूपीसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम क्लीन चिट दे चुकी है।
मजे की बात तो यह है कि उस चोरी की भी जांच निदेशक परिचालन को ही सौंपी गई है। जबकि यहां अगर सूत्रों की मानें तो बिना निदेशक परिचालन की सहभागिता या लापरवाही के कहीं भी बिजली चोरी हो ही नहीं सकती है। उल्लेखनीय तो यह भी है कि पुराने प्रकरणों की जांचों को यदि गंभीरता से लिया जाए तो निदेशक परिचालन की भूमिका स्वत: ही मिल जाएगी।

एक और चर्चित प्रकरण, जो लक्सर रुड़की क्षेत्र में आता है, उसके तार सीधे राजनीतिक दमखम वाले लोगों से जुड़े हैं। उन्हीं की स्टील कारखानों में पकड़ी गई चोरियों को छिपाने व एक अन्य प्रकरण में इन्हीं तथाकथित माफिया के दबाव में किसी अन्य उद्योगपति के विरुद्ध उत्पीडऩ की कार्रवाई में भी संदिग्ध भूमिका बताई जा रही है। पिटकुल से जुड़े भी कई मामलों भी निदेशक परिचालन की खासी चर्चित भूमिका रही है, फिर भी…! रुड़की 55 लाख के गबन के आरोपी अधिशासी अभियन्ता के मामले में विगत दो वर्ष से अधिक बीत जाने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई का ना होना भी सहभागिता का प्रमाण है।

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