युद्ध अपराध के सख्त कानूनी घेरे में फंसा रूस, अंतरराष्‍ट्रीय न्यायालय में हो रही सुनवाई

-यूक्रेन ने रूस पर आम नागरिकों को निशाना बनाने का लगाया है आरोप, 39 देश कर रहे हैं यूक्रेन के आरोप का समर्थन

नई दिल्‍ली/कीव। रुस- यूक्रेन युद्ध के दौरान आम नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप में रूस को कठघरे में खड़ा करने वाले यूक्रेन ने रूस पर युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया है, जिसके बाद यह मामला अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय पहुंच गया है। हालांकि, रूस ने आम नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है। मगर, रूस पर युद्ध अपराध के मामले में जांच शुरू हो गई है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि युक्रेन-रूस युद्ध में कितने आम नागर‍िक हताहत हुए हैं। यह युद्ध अपराध क्‍या है? किस अंतरराष्‍ट्रीय कानून के तहत यह आरोप तय किया जाता है? इस बाबत अंतरराष्‍ट्रीय संधियां क्‍या हैं? युद्ध अपराध की सुनवाई कैसे होती है? आइये जानते हैं।

दरअसल, युद्ध अपराध को परिभाषित करने वाले कानून जिनेवा कन्‍वेशन कहलाते हैं। प्रश्‍न यह है कि जिनेवा कन्‍वेंशन क्‍या है? यह एक अंतरराष्‍ट्रीय संधि है। यह किसी भी युद्ध में मानवीय उपचार के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों को निर्धारित करती है। पहले तीन कन्वेंशन युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों और युद्ध बंदियों की सुरक्षा के लिए प्रावधान निर्धारित करते हैं, जबकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सामने आए चौथे कन्वेंशन के तहत युद्ध क्षेत्र के में आम नागरिकों की सुरक्षा की जाती है। 1949 में जिनेवा कन्वेंशन को रूस सहित संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों ने अनुमोदित किया था।

जिनेवा कन्‍वेशन के पहले तीन कन्‍वेंशन युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों और युद्ध बंदियों की सुरक्षा के लिए प्रावधान निर्धारित करते हैं। दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद चौथा कन्‍वेंशन अस्तित्‍व में आया। इसके तहत युद्ध क्षेत्र के आम नागरिकों की सुरक्षा की जाती है। वर्ष 1949 के ज‍िनेवा कन्‍वेंशन को रूस सहित संयुक्‍त राष्‍ट्र के सभी सदस्‍य देशों ने अनुमोदित किया था। चौथे कन्‍वेंशन में युद्ध अपराधों की परिभाषा निर्धारित की गई है। इसके तहत जंग के दौरान जानबूझ कर हत्‍या शामिल है। इसमें अत्‍याचार या अमानवीय व्‍यवहार को शामिल किया गया है। इसके तहत जानबूझ कर गंभीर शारीरिक चोट या स्‍वास्‍थ्‍य को नुकसान पहुंचाना शामिल है।

39 देशों द्वारा जांच की मांग उठाए जाने के बाद उठाया कदम

यूक्रेन संघर्ष का मामला अंतरराष्‍ट्रीय अदालत में पहुंच चुका है। अंतरराष्‍ट्रीय अपराध अदालत के मुख्‍य अभियोजक ने कहा कि कथित युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के सबूत एकत्रित किए जा रहे हैं। अदालत ने यह कदम 39 देशों द्वारा जांच की मांग उठाए जाने के बाद उठाया है। वहीं, दूसरी ओर रूस ने आम नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि रूस पर जिसका आरोप लग रहा है वह युद्ध अपराध क्या हैं?

क्‍या है रोम अधिनियम

वर्ष 1998 का रोम अधिनियम भी सशस्त्र संघर्ष के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संधि है। इस संधि के मुताबिक युद्ध अपराध है। अन्तरराष्ट्रीय कानून और उसके उल्लंघन को समझने के लिए उपयोगी गाइड माना जाता है। इसके तहत जानबूझ कर आम लोगों पर सीधे हमले करना या युद्ध में जो लोग शामिल नहीं हैं, उन पर जानबूझ कर हमले करना, अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इस संधि के तहत बिना रक्षा कवच वाले गांवों, आवासों या इमारतों पर किसी भी तरह से हमला या बमबारी अपराध की श्रेणी में आता है। इसके मुताबिक अस्पताल, धार्मिक आस्था या शिक्षा से जुड़ी इमारतों को जानबूझ कर निशाना नहीं बनाया जा सकता है। यह संधि कुछ हथियारों के साथ-साथ जहरीली गैसों के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाती है।

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